चतरा। हंटरगंज प्रखंड में कथित धर्मांतरण को लेकर सामने आ रही शिकायतों के बीच डाटम गढ़पर गांव में एक बार फिर विवाद उत्पन्न हो गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी महिलाएं गांव में पहुंचकर स्थानीय महिलाओं को पैसे, इलाज, बच्चों की पढ़ाई और अन्य सुविधाओं का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रही थीं। सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और इसका विरोध शुरू कर दिया। इस दौरान मारपीट और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में बाहरी महिलाओं के आने और स्थानीय महिलाओं से बातचीत किए जाने की जानकारी मिलने के बाद वे सुषमा देवी के घर पहुंचे। ग्रामीणों का दावा है कि वहां करीब एक से दो दर्जन महिलाएं मौजूद थीं। आरोप है कि इनमें बिहार से आई महिलाएं भी शामिल थीं और स्थानीय महिलाओं को एक धर्म विशेष अपनाने के लिए समझाया जा रहा था। ग्रामीणों ने दावा किया कि धर्म परिवर्तन के बदले आर्थिक मदद, इलाज, बच्चों की शिक्षा और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बातें कही जा रही थीं।
इसी को लेकर ग्रामीणों और वहां मौजूद लोगों के बीच विवाद शुरू हो गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उनके साथ लाठी-डंडे और ईंट से मारपीट की गई। कुछ ग्रामीणों ने झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। विवाद की सूचना मिलने के बाद ग्रामीणों ने हंटरगंज थाना प्रभारी संदीप कुमार को दूरभाष पर जानकारी दी।
सूचना मिलने पर एएसआई रंजीत कुमार सिंह पुलिस बल के साथ डाटम गढ़पर गांव पहुंचे। पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। पुलिस के स्तर से मौके पर एक धार्मिक पुस्तक जब्त किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक किसी भी पक्ष की ओर से थाने में लिखित शिकायत नहीं दिए जाने की जानकारी मिली है। पुलिस का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने और जांच के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
ग्रामीणों का कहना है कि हंटरगंज प्रखंड में कथित धर्मांतरण से जुड़ी शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। सोहाद, डुमरी कला और धारधारा गांव में भी महिलाओं को कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए समझाए जाने की शिकायत किए जाने का दावा ग्रामीणों ने किया है। डुमरी कला में ऐसी सूचना पर पुलिस के पहुंचने और कुछ महिलाओं से पूछताछ किए जाने की बात भी ग्रामीणों ने कही है। वहां से धार्मिक पुस्तक बरामद होने का दावा भी किया गया था। वहीं धारधारा गांव में भी इसी तरह की शिकायत सामने आने की बात कही गई है।
लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं प्रशासन और पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि डाटम गढ़पर में लगाए गए धर्मांतरण और मारपीट के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
झारखंड में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में झारखंड धर्म स्वतंत्र अधिनियम, 2017 लागू है। कानून में बल, प्रलोभन या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराने या उसका प्रयास करने पर रोक का प्रावधान है। हालांकि, डाटम गढ़पर की घटना में कानून की कौन-सी धाराएं लागू होंगी, यह पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।

