Breaking
Wed. Sep 23rd, 2026

*प्रकृति का महापर्व करम पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ संपन्न* *उपायुक्त मनीष कुमार ने परिवार के साथ की पूजा, कहा- प्रकृति का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी*

चाईबासा: प्रकृति और भाई-बहन के प्रेम का महापर्व करम शहर चाईबासा में हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ। छोटा नीमडीह, बड़ा नीमडीह, गुटूसाई, टुंगरी और महुलसाई सहित उरांव समाज के सात अखाड़ों बानटोला, चित्रोटोला, मेरी टोला, पुलहातु, तेलंगाखोरी, कुम्हार टोली और नदीपार में लोगों ने पारंपरिक तरीके से करम पर्व मनाया। इस दौरान अखाड़ों में रातभर पारंपरिक गीत, नृत्य और मांदर की थाप गूंजती रही।

करम पर्व के अवसर पर युवक-युवतियां उपवास रखकर पूजा-अर्चना में शामिल हुए। पर्व की विधि के अनुसार करम डाल को पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ अखाड़े में लाया गया और विधिवत स्थापित किया गया। इसके बाद पूजा-अर्चना कर प्रसाद का वितरण किया गया। रातभर लोगों ने करम डाल के समक्ष पारंपरिक गीत और नृत्य प्रस्तुत कर सुख-समृद्धि की कामना की। करम पर्व प्रकृति के प्रति आस्था और उसके संरक्षण का संदेश देने वाला पर्व माना जाता है।

इस अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ पारंपरिक वेशभूषा में बानटोला और पुलहातु अखाड़ा पहुंचे। उन्होंने परिवार के साथ विधि-विधान से करम डाल की पूजा की और सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने समाज के लोगों के साथ पारंपरिक नृत्य किया और मांदर भी बजाया। उनके साथ अनुमंडल पदाधिकारी सदर चाईबासा संजय कुमार और प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी सदर चाईबासा उपेंद्र कुमार ने भी नृत्य किया और मांदर बजाया।

उपायुक्त मनीष कुमार ने कुड़ुख भाषा में लोगों को करम पर्व की बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रकृति की संरचना हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण है और उसका संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने आयोजन समितियों को पर्व में आमंत्रित करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि करम पर्व झारखंड की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर है। इसे समझने और आने वाली पीढ़ी तक इसकी परंपरा पहुंचाने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रकृति के महत्व का एहसास हो सके।

अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि करम पर्व की महिमा और इसे मनाने की परंपरा को करीब से जानने का उन्हें मौका मिला। उन्होंने कहा कि उपवास रखकर लोग जिस तरह से पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पर्व मनाते हैं, वह प्रकृति के प्रति लोगों की आस्था को दिखाता है। उन्होंने कहा कि पर्व के दौरान प्रकृति के संरक्षण को लेकर लोगों में उत्साह देखने को मिला। उन्होंने सभी प्रकृति प्रेमियों को करम पर्व की बधाई और शुभकामनाएं दीं।

प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी सदर चाईबासा उपेंद्र कुमार ने कहा कि करम पर्व मनुष्य और प्रकृति को जोड़ने वाला पर्व है। हम सभी प्रकृति को नमन करते हैं, क्योंकि इसी के संरक्षण में हमारा जीवन चलता है। उन्होंने कहा कि जरूरत है कि सभी लोग प्रकृति के महत्व को समझें और उसके संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने जिलेवासियों को करम पर्व की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम के दौरान लाइब्रेरीमेन संजय कच्छप और ब्लडमेन लालू कुजूर सहित समाज के लोगों ने अतिथियों का अंगवस्त्र देकर स्वागत किया। उन्हें विभिन्न अखाड़ों में ले जाकर करम पर्व की परंपरा और अखाड़ों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उरांव समाज के लोग शामिल हुए।

Related Post