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Fri. Apr 10th, 2026

पोटका में बांग्ला भाषा अकादमी गठन की मांग तेज, प्रतिनिधिमंडल ने बीडीओ को सौंपा ज्ञापन

जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका क्षेत्र में विलुप्त होती मातृभाषा बांग्ला को बचाने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। इसी क्रम में बंग भाषी उन्नयन समिति का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को पोटका के प्रखंड विकास पदाधिकारी अरुण मुंडा से मिला और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा।

समिति के सदस्यों ने ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार से बांग्ला भाषा अकादमी के गठन की मांग की। उनका कहना है कि अकादमी बनने से न सिर्फ बांग्ला भाषा को संरक्षित किया जा सकेगा, बल्कि बंगाली भाषी समाज की सांस्कृतिक पहचान भी बनी रहेगी। साथ ही सरकारी विद्यालयों में बांग्ला भाषा की पढ़ाई को दोबारा शुरू करने की दिशा में भी ठोस पहल हो सकेगी।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल पूर्व जिला परिषद सदस्य करुणामय मंडल, राजकुमार गुप्ता, सुनील डे और शंकर चंद्र गोप ने कहा कि झारखंड में बांग्ला भाषा धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रही है। उन्होंने चिंता जताते हुए बताया कि पाठ्यपुस्तकों और संसाधनों के अभाव में सरकारी स्कूलों में बांग्ला की पढ़ाई लगभग बंद हो चुकी है। ऐसे में यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी मातृभाषा और पहचान दोनों से वंचित हो जाएंगी।

समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हस्तक्षेप कर जल्द से जल्द बांग्ला भाषा अकादमी के गठन की मांग की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य में बड़ी संख्या में लोग बांग्ला बोलते हैं, बावजूद इसके भाषा के संरक्षण के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं हो रहे हैं।

इस दौरान पोटका बीडीओ अरुण मुंडा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि यदि इसी तरह लगातार प्रयास जारी रहे, तो बांग्ला भाषा को आने वाले समय में उचित पहचान दिलाने की दिशा में सकारात्मक पहल संभव है।

मौके पर डॉ. सुंदर लाल दास, सुनील कुमार डे, शंकर चंद्र गोप, मृणाल कांति पाल, कृष्णो पदो मंडल, संजय साहू, प्रतिमा मंडल, शरदचंद दास, तपन मंडल, सुधीर सरदार सहित बड़ी संख्या में समिति के सदस्य उपस्थित थे।

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