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Thu. Apr 9th, 2026

जमशेदपुर में अभियांत्रिकीय उपकरणों की शेष आयु आकलन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

जमशेदपुर।सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला में गुरुवार से अभियांत्रिकीय उपकरणों की शेष आयु आकलन (आरएलए-२०२६) विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। नौ और दस अप्रैल तक चलने वाले इस आयोजन में देशभर से लगभग एक सौ पचास वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। संगोष्ठी में आईआईटी खड़गपुर, सीएसआईआर-सीएमईआरआई दुर्गापुर, एनटीपीसी, भारतीय तेल निगम, भारत पेट्रोलियम, महिंद्रा रक्षा सहित कई प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही।

संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. जी. सतीश रेड्डी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने की। इस अवसर पर संगोष्ठी के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार साहू तथा संयोजक डॉ. सुमंता बगुई भी मंच पर मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि देश में पेट्रो रसायन, ताप विद्युत और खनन क्षेत्रों के लगभग साठ से सत्तर प्रतिशत औद्योगिक ढांचे अपनी निर्धारित आयु से अधिक समय से उपयोग में हैं। ऐसे में शेष आयु आकलन इन संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके सुरक्षित उपयोग को बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संगोष्ठी के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार साहू ने आयोजन के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया कि इस क्षेत्र में संस्थान ने ताप विद्युत, अंतरिक्ष तथा तेल और गैस क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपकरणों की संरचनात्मक मजबूती और दीर्घायु के आकलन में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

मुख्य अतिथि डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने अपने संबोधन में कहा कि शेष आयु आकलन देश के औद्योगिक ढांचे के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने बताया कि बॉयलर, टरबाइन, दाब पात्र और नली प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों की सुरक्षा और विश्वसनीयता बनाए रखने में इसकी अहम भूमिका है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि मिसाइल, लड़ाकू विमान और अन्य वायुयान प्रणालियों में भी इसका उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां सुरक्षा से समझौता किए बिना संरचनात्मक आयु बढ़ाना आवश्यक होता है।

उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता(ai) के उपयोग पर भी जोर देते हुए कहा कि इसके माध्यम से शेष आयु का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले सेवा आंकड़ों के संग्रह को इस प्रक्रिया की सफलता के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस आकलन का दायरा यांत्रिक उपकरणों के साथ-साथ विद्युत घटकों तक भी बढ़ाया जाना चाहिए।

दो दिवसीय संगोष्ठी के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में समय-निर्भर विकृति और तनाव विफलता आधारित आयु आकलन, सूक्ष्म संरचना तथा आंकड़ा आधारित प्रतिमान, उन्नत संवेदक और बिना क्षति जांच तकनीक तथा इस क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इस आयोजन में विद्युत, तेल एवं गैस, पेट्रो रसायन, अंतरिक्ष, इस्पात और निर्माण क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ शोधार्थी और विद्यार्थी भी भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसे संयोजक डॉ. सुमंता बगुई ने प्रस्तुत किया। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के आयोजन देश में पुराने औद्योगिक ढांचों की सुरक्षित आयु वृद्धि सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे औद्योगिक दक्षता और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलती है।

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