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Thu. Apr 2nd, 2026

हनुमान जयंती पर लक्ष्मीनगर में उमड़ा भक्तिसागर, पार्थिव शिवलिंग यज्ञ में दिखी शिव-हनुमान एकत्व की झलक

जमशेदपुर। टेल्को थाना क्षेत्र स्थित लक्ष्मीनगर हनुमान मंदिर इन दिनों गहन आध्यात्मिक साधना और भक्ति के अद्वितीय संगम का साक्षी बन रहा है। युवक संघ दुर्गा पूजा समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय पार्थिव शिवलिंग पूजन यज्ञ अपने चरम की ओर बढ़ रहा है। पांचवें दिन ही श्रद्धालुओं के संकल्प से पांच लाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण पूर्ण हो गया, जिससे पूरे आयोजन में उत्साह और आस्था का अभूतपूर्व माहौल बन गया है। अब आयोजकों का लक्ष्य शेष दो दिनों में इस संख्या को सात से आठ लाख तक पहुंचाने का है।

इस पावन अनुष्ठान के दौरान प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु मिट्टी से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं। यह यज्ञ न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि सामूहिक भक्ति और सनातन संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति भी बन गया है।

पांचवें दिन आयोजित शिवकथा में आचार्य श्री राजकुमार मिश्रा जी ने भगवान शिव की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए एक प्रेरणादायक कथा सुनाई। उन्होंने नर्मदा तट पर रहने वाले ब्राह्मण विश्वनाथ और उनकी पत्नी शुचिष्मली की कथा के माध्यम से बताया कि सच्ची श्रद्धा और तपस्या से भगवान शिव अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। आचार्य ने कहा कि “भगवान शिव अत्यंत भोले हैं, वे अपने भक्तों के प्रेम और भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। शिवलिंग की पूजा सृष्टि के मूल तत्व की आराधना है, जो जीवन में शांति, समृद्धि और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।”

हनुमान जयंती के पावन अवसर पर आचार्य ने भगवान हनुमान की महिमा का भी विशेष रूप से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि “हनुमान जी केवल रामभक्त ही नहीं, बल्कि वे स्वयं भगवान शिव के अंशावतार हैं। शास्त्रों के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया, तब उनकी सेवा और सहयोग के लिए भगवान शिव ने हनुमान के रूप में जन्म लिया। इस प्रकार हनुमान जी में शिव की शक्ति, भक्ति और पराक्रम का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।”

आचार्य ने आगे बताया कि हनुमान जी को ‘रुद्रावतार’ कहा जाता है, अर्थात वे भगवान शिव के ग्यारह रुद्रों में से एक माने जाते हैं। उनकी उपासना से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। हनुमान जी अपने भक्तों को साहस, बुद्धि और बल प्रदान करते हैं, इसलिए उन्हें ‘संकटमोचन’ भी कहा जाता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि “यदि जीवन में कष्ट, भय या बाधाएं हों, तो हनुमान जी की भक्ति और शिवलिंग की पूजा से निश्चित रूप से समाधान मिलता है। शिव और हनुमान की आराधना एक ही ऊर्जा के दो रूप हैं।”

इस विशेष दिन पर कथा के समापन के पश्चात 1008 बार हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया। मंदिर परिसर “जय बजरंगबली” और “हर हर महादेव” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में समिति के सदस्य विजय कुमार, राकेश सिंह बुलबुल, जय चौधरी, सागर, साहिल, अमन और संजय सिंह सहित कई कार्यकर्ता निरंतर सेवा में जुटे हुए हैं।

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