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एफ़एसएसएआई (FSSAI)द्वारा स्थायी लाइसेंस देने का निर्णय पीएम मोदी के सुधारवादी विज़न को दर्शाता है; यह सरकारी नियामकीय सुधारों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है* *सुरेश सोंथालिया*

जमशेदपुर 15 मार्च

एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम के तहत केंद्र सरकार ने देश में पहली बार व्यापारिक समुदाय पर अनुपालन के बोझ को कम करने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से स्थायी (Perpetual) लाइसेंस देने की पहल की है। इस निर्णय का स्वागत करते हुए सुरेश सोंथालिया कन्फ़ेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स(कैट) के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री ने कहा कि देशभर के व्यापारी इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिनके सुधारवादी नेतृत्व में ऐसे प्रगतिशील फैसले संभव हो पाए हैं।

सोंथालिया ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के मार्गदर्शन में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया(FSSAI) ने घोषणा की है कि अब खाद्य व्यवसाय संचालकों को लाइसेंस स्थायी आधार पर दिए जाएंगे और इसके लिए समय-समय पर नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने श्री नड्डा को इस ऐतिहासिक सुधार का अग्रदूत बताया और उनके प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि ये बड़े सुधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न के अनुरूप हैं जिसके तहत नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाकर व्यापारियों, छोटे उद्यमियों और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए पारदर्शी और व्यापार-अनुकूल वातावरण बनाया जा रहा है।

इस निर्णय का स्वागत करते हुए सोंथालिया ने कहा कि FSSAI लाइसेंस और पंजीकरण को स्थायी वैधता देना एक ऐतिहासिक सुधार है, जो ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि हर वर्ष या समय-समय पर लाइसेंस का नवीनीकरण करना लंबे समय से एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया रही है, जिससे व्यापारियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था और कई बार इसमें देरी तथा भ्रष्टाचार की संभावनाएँ भी पैदा हो जाती थीं। स्थायी लाइसेंस की नई व्यवस्था ऐसे सभी अवरोधों को समाप्त करेगी और खाद्य व्यवसाय संचालकों के लिए अनुपालन को काफी सरल बनाएगी।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया ने कहा कि यह सुधार गेम-चेंजर साबित हो सकता है और अन्य नियामकीय प्राधिकरणों तथा सरकारी विभागों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है, ताकि वे भी इसी प्रकार की व्यवस्था अपनाकर विभिन्न क्षेत्रों में अनुपालन के बोझ को कम कर सकें और देश में ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस को और मजबूत बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि इन सुधारों से देशभर में लगभग 2.5 करोड़ खाद्य व्यवसाय संचालकों, जिनमें छोटे व्यापारी, खाद्य निर्माता, रेस्टोरेंट संचालक और स्ट्रीट फूड विक्रेता शामिल हैं, को बड़ा लाभ मिलेगा।

कैट के चेयरमैन ब्रजमोहन अग्रवाल ने बताया कि FSSAI के बेसिक पंजीकरण के लिए टर्नओवर सीमा ₹12 लाख से बढ़ाकर ₹1.5 करोड़ कर दी गई है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी। इससे सूक्ष्म और छोटे खाद्य व्यवसायों को बड़ी राहत मिलेगी।

इसके अतिरिक्त, संशोधित ढांचे के तहत ₹50 करोड़ तक के टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए राज्य लाइसेंस आवश्यक होगा, जबकि ₹50 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए केंद्रीय लाइसेंस लागू होगा, जिससे लाइसेंसिंग व्यवस्था और अधिक सरल हो जाएगी।

सोंथालिया ने यह भी कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत नगर निगमों या टाउन वेंडिंग समितियों में पंजीकृत स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को अब FSSAI में स्वतः पंजीकृत माना जाएगा, जिससे अतिरिक्त पंजीकरण की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।

इसके साथ ही एक प्रौद्योगिकी आधारित जोखिम-आधारित निरीक्षण प्रणाली भी लागू की जाएगी, जिसके अंतर्गत निरीक्षण खाद्य उत्पाद की प्रकृति, पूर्व अनुपालन रिकॉर्ड, तृतीय-पक्ष ऑडिट प्रदर्शन तथा निगरानी से प्राप्त जानकारी के आधार पर किए जाएंगे। इससे अनावश्यक निरीक्षण कम होंगे और खाद्य सुरक्षा के उच्च मानकों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

कैट ने कहा कि ये सुधार पारदर्शी, कुशल और व्यापार-अनुकूल नियामकीय वातावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, साथ ही उपभोक्ताओं के लिए खाद्य सुरक्षा के उच्च मानकों को भी सुनिश्चित करेंगे।

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