चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर अंचल के राजस्व ग्राम डिम्बुली में उद्योग स्थापना के नाम पर ली गई 110.53 एकड़ सीएनटी जमीन को लेकर विवाद गहराने लगा है। दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जमीन पर उद्योग स्थापित नहीं होने से मूल रैयतों और आदिवासी संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है।
भारत आदिवासी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुशील बारला के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जमीन वापस दिलाने की मांग को लेकर राज्य सरकार के समक्ष मामला उठाया है। इस संबंध में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरूवा, झारखंड सरकार के मुख्य सचिव, संबंधित विभाग के सचिव, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष और भारत सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्रालय को ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि कंपनी द्वारा जमीन मूल रैयतों को वापस नहीं की जाती है तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
मामला मनोहरपुर अंचल के राजस्व ग्राम डिम्बुली (हल्का संख्या-07, थाना संख्या-86) का है। वर्ष 2005 में M/S V.S. Dempo & Co. Pvt. Ltd. ने झारखंड सरकार के साथ समझौता कर क्षेत्र में उद्योग लगाने की योजना बनाई थी। उद्योग से विकास और रोजगार के वादे के बाद ग्रामीणों ने अपनी कृषि योग्य जमीन देने पर सहमति दी थी। इसके बाद छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) की धारा 49 के तहत उपायुक्त पश्चिमी सिंहभूम द्वारा विभिन्न मामलों में आदेश पारित कर कंपनी को जमीन खरीदने की अनुमति दी गई।
इन आदेशों के आधार पर कंपनी ने कुल 110.53 एकड़ जमीन खरीदी। आदेश में यह भी शर्त थी कि पांच वर्ष के भीतर उद्योग स्थापित करना होगा, अन्यथा अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी और जमीन मूल रैयतों को लौटानी होगी। लेकिन 21 साल बाद भी जमीन पर कोई उद्योग स्थापित नहीं हुआ है और आज भी ग्रामीण वहां खेती कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 101 का भी हवाला दिया है, जिसमें निर्धारित समय में उपयोग नहीं होने पर जमीन वापस करने का प्रावधान है।
सुशील बारला ने कहा कि उद्योग के नाम पर आदिवासियों की जमीन ली गई, लेकिन न उद्योग लगा और न विकास हुआ। यदि कंपनी उद्योग नहीं लगा सकती तो जमीन वापस करनी चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।

