राँची। Railway Protection Force (आरपीएफ) द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान “नन्हे फरिश्ते” के तहत राँची रेलवे स्टेशन पर सतर्कता और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए चार नाबालिग बच्चों को सुरक्षित किया गया। यह कार्रवाई Pawan Kumar, मंडल सुरक्षा आयुक्त, राँची मंडल के निर्देश पर की गई।
आरपीएफ पोस्ट राँची की टीम नियमित जांच के दौरान अपराह्न प्लेटफॉर्म संख्या 1 पर एक नाबालिग बालक को अकेले घूमते हुए देखा। पूछताछ में उसने अपना नाम सोनू उराँव (लगभग 16 वर्ष), पिता साहदेव उराँव, निवासी नरकोपी, जिला राँची बताया। बालक ने स्वीकार किया कि वह बिना परिजनों को बताए घर से निकलकर स्टेशन आ गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आरपीएफ ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और उसे सुरक्षित रूप से Childline Ranchi को अग्रिम देखभाल एवं कार्रवाई के लिए सौंप दिया।
इसी दौरान प्लेटफॉर्म संख्या 1ए पर तीन नाबालिग बालिकाएँ संदिग्ध अवस्था में बैठी मिलीं। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम सीमा उराँव (14 वर्ष), टेट्री उराँव (11 वर्ष) और लक्ष्मी उराँव (14 वर्ष) बताए। तीनों बालिकाएँ नरकोई, जिला राँची की निवासी हैं। उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण वे घरेलू काम की तलाश में चेन्नई जाने के उद्देश्य से घर से निकली थीं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरपीएफ टीम ने तीनों बालिकाओं को संरक्षण में लिया और सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद उन्हें भी चाइल्डलाइन राँची के सुपुर्द कर दिया, ताकि आगे की काउंसलिंग, परिजनों से संपर्क और पुनर्वास की प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।
इस सराहनीय कार्रवाई में उपनिरीक्षक सोहन लाल, उपनिरीक्षक रवि शेखर, स्टाफ मुकेश प्रसाद, मंजू कुमारी, रेनू तथा एस.पी. खलको की सक्रिय और सतर्क भूमिका रही। आरपीएफ की इस पहल से संभावित मानव तस्करी और बाल शोषण जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिली है।

