चाईबासा: झारखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026–27 के बजट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
दोनों नेताओं ने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए “केंद्रीय फंड नहीं मिला” का बहाना बना रही है।
मधु कोड़ा ने कहा कि ग्रामीण विकास के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान नहीं किया गया है और अधूरी पड़ी योजनाओं को पूरा करने की कोई ठोस योजना नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि गांवों में सड़क, पुल-पुलिया और सिंचाई योजनाएं अधूरी हैं, जबकि पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उनके अनुसार यह बजट विकास का दस्तावेज नहीं, बल्कि सरकार की नाकामी को दर्शाता है।
गीता कोड़ा ने कहा कि महिलाओं, विधवाओं, युवाओं और आदिवासी बहुल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बजट में कोई ठोस पहल नजर नहीं आती।
स्वरोजगार, कौशल विकास और स्थायी आजीविका के लिए स्पष्ट योजना का अभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि सहायता राशि के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर विकास कार्य ठप हैं।
दोनों नेताओं ने कहा कि सरकार को बहानेबाजी छोड़कर जिम्मेदारी लेनी चाहिए और ग्रामीण विकास, रोजगार, कृषि, शिक्षा तथा स्वास्थ्य के लिए स्पष्ट कार्ययोजना के साथ पर्याप्त बजट का प्रावधान करना था।

