चाईबासा: राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए प्रस्तुत बजट पर पूर्व मंत्री सह भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुंवर गागराई ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बजट में झारखंड के विकास की स्पष्ट दिशा नजर नहीं आती और यह राज्य की वास्तविक समस्याओं से दूर है।
बड़कुंवर गागराई ने आरोप लगाया कि बजट में सामाजिक सुरक्षा को लेकर ठोस प्रावधान नहीं दिखते। उन्होंने कहा कि राज्य के गरीब, बुजुर्ग, महिलाएं और जरूरतमंद वर्ग मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन बजट में उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप व्यवस्था नहीं की गई। उनके अनुसार झारखंड सरकार अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने में विफल रही है।
स्वास्थ्य व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के अधिकांश सरकारी अस्पतालों की स्थिति दयनीय है। मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। कई ब्लड बैंकों का नवीनीकरण नहीं हुआ है, जिससे रक्त की कमी की समस्या बनी रहती है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में आम मरीजों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मईया सम्मान योजना पर भी सवाल उठाया।
बड़कुंवर गागराई ने कहा कि यह योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है और कई जिलों में महिलाएं अपनी समस्याओं को लेकर लंबी दूरी तय कर जनप्रतिनिधियों के आवास तक पहुंच रही हैं। इससे साफ है कि योजना के क्रियान्वयन में कमी है।
सड़क और आधारभूत संरचना की स्थिति पर भी उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य की कई सड़कें जर्जर हैं और मरम्मत कार्य समय पर नहीं हो रहा है। सरकार शिलान्यास तो करती है, लेकिन योजनाओं का उद्घाटन और पूर्णता समय पर नहीं हो पाती। कई परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं, जिससे जनता को लाभ नहीं मिल रहा।
उन्होंने कहा कि चुनावी घोषणा पत्र में सरकार ने अनेक योजनाओं का वादा किया था, लेकिन उनमें से कई योजनाएं अब तक धरातल पर नहीं उतरी हैं। सरकार को चाहिए कि वह घोषणाओं के बजाय अधूरी योजनाओं को पूरा करने और नई योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर ध्यान दे, ताकि राज्य की जनता को वास्तविक विकास का लाभ मिल सके।

