जमशेदपुर। साकची स्थित श्री रामलीला मैदान में श्री रामलीला उत्सव ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री राम-कृष्ण मित्र मंडल द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन मंगलवार को अत्यंत भक्तिमय वातावरण में हुआ। कथा के सातवें और अंतिम दिन सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन, वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन तथा फूलों की होली का आयोजन किया गया, जिससे पूरा परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया।
कथा व्यासपीठ से वृंदावन धाम से पधारे पूज्य संत श्री स्वामी सर्वानंद जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रसंगों का रसपूर्ण और भावपूर्ण वर्णन करते हुए सुदामा चरित्र की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सुदामा और भगवान श्रीकृष्ण की मित्रता त्याग, समर्पण और सच्चे प्रेम का प्रतीक है। सुदामा की निर्धनता और उनकी निष्कपट भक्ति यह संदेश देती है कि भगवान को बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि सच्चे मन की भावना प्रिय होती है। जैसे ही संतश्री ने द्वारिका में सुदामा के स्वागत और उनके जीवन परिवर्तन का प्रसंग सुनाया, श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा पंडाल “राधे-श्याम” के जयघोष से गूंज उठा।
समापन दिवस पर विधिवत हवन-पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आहुति देकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की। वैदिक मंत्रों की गूंज और धूप-दीप की सुगंध से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। हवन के उपरांत फूलों की होली खेली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे पर पुष्प वर्षा कर प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। रंग-बिरंगे फूलों से सजा पंडाल वृंदावन की होली की छटा प्रस्तुत कर रहा था।
कार्यक्रम में ट्रस्ट और मंडल के कई गणमान्य सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से गोपी बाबू, सुभाष चंद्र शाह, डॉ. डीपी शुक्ला, मनोज मिश्रा, शंकर लाल सिंघल, मगन पांडे, नीरज तिवारी, रोहित मिश्रा, जेके शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
सात दिनों तक चली इस श्रीमद्भागवत कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कथा के दौरान भजन-कीर्तन, आरती और प्रसाद वितरण का क्रम निरंतर चलता रहा। अंतिम दिन महाआरती के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और नगरवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक जागरण का संकल्प दोहराया।

