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कॉर्पोरेट की चमक छोड़, अब जनसेवा की राह पर सौमित्र वर्मा*

जमशेदपुर: शहर की राजनीति में जब शिक्षा, अनुभव और सेवा का संगम होता है, तो विकास की नई उम्मीदें जगती हैं। जमशेदपुर की मिट्टी से उपजे सौमित्र वर्मा आज इसी उम्मीद का चेहरा बनकर उभरे हैं। वार्ड नंबर 9 से पार्षद पद के प्रत्याशी सौमित्र वर्मा ने पिछले कुछ दिनों से अपने क्षेत्र में सघन जनसंपर्क अभियान छेड़ रखा है।

*बालीगुमा से बस्तियों तक: समस्याओं का जायजा और सीधा संवाद*

सौमित्र वर्मा का दौरा लगातार जारी है। उन्होंने बालीगुमा के विभिन्न क्षेत्रों समेत वास्तु विहार, आशियाना सनसिटी, निर्माण साईं कॉम्प्लेक्स, सुखना बस्ती, न्यू ग्रीन सिटी, गायत्री होम्स, केदार बगान और खड़िया बस्ती जैसे दर्जनों इलाकों का पैदल भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने न केवल लोगों से मुलाकात की, बल्कि स्थानीय समस्याओं को करीब से समझा और अपना चुनावी एजेंडा जनता के बीच रखा।

*विरासत में मिली सेवा भावना, शिक्षा में विश्वस्तरीय पहचान*

सौमित्र जी एक बेहद प्रतिष्ठित परिवार से आते हैं। उनके पिता, स्वर्गीय डॉ. अरुण कुमार वर्मा, एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और अधीक्षक (Superintendent) रह चुके हैं। पिता के सेवाभावी आदर्शों को ही सौमित्र ने अपना मार्गदर्शक बनाया है।

उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें अन्य प्रत्याशियों से अलग खड़ा करती है:-

स्कूली शिक्षा: राजेंद्र विद्यालय, जमशेदपुर।

उच्च शिक्षा: रामजस कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) और सिम्बायोसिस (पुणे) से एमबीए।

विशेष प्रशिक्षण: प्रतिष्ठित XLRI, जमशेदपुर से उद्यमिता प्रबंधन।

*कॉर्पोरेट की चमक छोड़, चुना ज़मीन का रास्ता*

9 वर्षों तक कॉर्पोरेट जगत में मार्केटिंग और पीआर (PR) के ऊंचे पदों पर रहने के बाद, साल 2015 में सौमित्र जी ने अपनी जड़ों की ओर लौटने का फैसला किया। उन्होंने मत्स्य पालन, कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों में नए प्रयोग कर न केवल खुद को एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित किया, बल्कि ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन में भी बड़ी भूमिका निभाई।

*”मैं किसी का प्रतिद्वंदी नहीं, सेवक बनना चाहता हूँ”*

अपने जनसंपर्क के दौरान सौमित्र वर्मा एक बड़ी ही शालीन बात दोहराते हैं। उनका कहना है:

“मैं राजनीति में किसी का प्रतिद्वंदी बनकर नहीं आया हूँ। मेरा मकसद किसी को हराना नहीं, बल्कि अपने वार्ड की जनता का दिल जीतना है। राजनीति मेरे लिए विरोध की नहीं, बल्कि सेवा की जगह है।”

*चुनाव चिन्ह: ‘जंजीर छाप’ – विकास की नई कड़ी*

शिक्षा और अनुभव की इसी पूंजी के साथ सौमित्र वर्मा अब वार्ड नंबर 9 के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका चुनाव चिन्ह ‘जंजीर छाप’ है। वे जनता से अपील कर रहे हैं कि उनकी योग्यता और नेक इरादों पर भरोसा कर उन्हें एक मौका दिया जाए, ताकि वे वार्ड को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जा सकें।

अब यह वार्ड नंबर 9 की जनता के हाथ में है कि क्या वे इस शिक्षित, सुलझे हुए और कर्मठ व्यक्तित्व को अपना प्रतिनिधि चुनकर सेवा का अवसर देते हैं।

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