जमशेदपुर। मानगो नगर निगम के मेयर चुनाव के बीच स्थानीय राजनीति में एक नया विवाद उभर आया है। जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने मंगलवार को मानगो नगर निगम के उप नगर आयुक्त को पत्र लिखकर ‘लोटस रेसीडेंसी’ नामक बहुमंजिला इमारत की वैधता की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह भवन अवैध रूप से निर्मित है और इसमें जल-मल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे आसपास के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अपने पत्र में राय ने उल्लेख किया है कि मानगो नगर निगम क्षेत्र में स्थित लोटस रेसीडेंसी को कांग्रेस समर्थित मेयर प्रत्याशी सुधा गुप्ता ने अपने नामांकन पत्र में अपना आवास बताया है। राय ने दावा किया है कि इस भवन का नक्शा स्वीकृत नहीं है और सीवरेज ट्रीटमेंट की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। उनका आरोप है कि इसके बावजूद नगर निगम ने निर्माण को नहीं रोका, जो प्रशासनिक निष्क्रियता या दबाव की ओर संकेत करता है।
राय ने पत्र में यह भी लिखा है कि सुमन मेमोरियल ट्रस्ट की जमीन पर इस भवन का निर्माण पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता के चचेरे साले चंदन मित्तल द्वारा कराया गया है। हालांकि भवन में किसकी कितनी हिस्सेदारी है, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे बन्ना गुप्ता से जुड़ा बताया जाता है। राय ने सवाल उठाया है कि क्या पिछले पांच वर्षों तक राज्य सरकार में मंत्री रहे बन्ना गुप्ता के प्रभाव के कारण नगर निगम ने इस भवन पर कार्रवाई नहीं की।
स्थानीय निवासियों की ओर से भी लंबे समय से शिकायतें किए जाने का दावा किया गया है। आरोप है कि लोटस रेसीडेंसी से निकलने वाला सीवरेज का गंदा पानी परिसर से बहकर सामने की खाली जमीन में फैलता है और वहां से आसपास के घरों में प्रवेश कर जाता है। खासकर बारिश के दिनों में स्थिति और बदतर हो जाती है। बताया गया है कि बीएसएनएल के एक सेवानिवृत्त अधिकारी चन्द्रशेखर सिंह के घर में अक्सर गंदा पानी घुस जाता है, जिससे उन्हें लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सरयू राय ने अपने पत्र में यह भी प्रश्न उठाया है कि जब स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायतें कीं और धरना-प्रदर्शन तक किया, तब भी नगर निगम ने जांच या कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने उप नगर आयुक्त से आग्रह किया है कि भवन के नक्शे, निर्माण अनुमति और सीवरेज व्यवस्था की विधिवत जांच कराई जाए तथा यदि अनियमितता पाई जाए तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मानगो मेयर चुनाव से ठीक पहले इस मुद्दे के उठने से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्ष इसे सत्ताधारी दल से जुड़े नेताओं पर दबाव की राजनीति और प्रशासनिक संरक्षण का मामला बता रहा है, जबकि कांग्रेस खेमे की ओर से अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और चुनावी माहौल में यह मुद्दा कितना असर डालता है।

