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अहंकार त्याग कर भगवान की शरण में आएं, वही सच्चा सुख है” — स्वामी सर्वानंद जी महाराज

जमशेदपुर। “जब तक मनुष्य अहंकार में डूबा रहता है, तब तक वह ईश्वर से दूर रहता है। जैसे इंद्र का मान भंग हुआ और वह भगवान की शरण में आया, वैसे ही हमें भी अहंकार त्याग कर प्रभु की शरण ग्रहण करनी चाहिए।” ये प्रेरणादायक वचन वृंदावन धाम से पधारे पूज्य संत स्वामी सर्वानंद जी महाराज ने साकची स्थित श्री रामलीला मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन अपने प्रवचन में कहे। उनके ओजस्वी शब्दों ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति भाव से भर दिया।

कथा पंडाल में सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। भजन-कीर्तन, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से संपूर्ण परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। स्वामी जी ने भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि जब इंद्र ने अपने अभिमान में आकर ब्रजवासियों पर प्रलयंकारी वर्षा की, तब भगवान ने अपनी कनिष्ठिका उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी की रक्षा की। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने समझाया कि सच्चा आश्रय केवल भगवान हैं और अहंकार का अंत निश्चित है।

उन्होंने नंद बाबा के एकादशी व्रत, यमुना स्नान तथा वरुण देव द्वारा नंद बाबा को अपने लोक ले जाने की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया। स्वामी जी ने कहा कि भगवान ने ग्वाल-बालों को बैकुंठ धाम का दर्शन कराकर यह सिद्ध किया कि वे केवल ब्रज के ही नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के पालनहार हैं। भक्त के प्रति भगवान का स्नेह अटूट होता है और वे हर परिस्थिति में अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।

रासलीला के प्रसंग पर स्वामी जी ने कहा कि रास आत्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। यह कोई सामान्य लीला नहीं, बल्कि भक्ति की पराकाष्ठा है। अरिष्टासुर वध का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान ने सदैव अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना की। अक्रूर जी द्वारा श्रीकृष्ण और बलराम को मथुरा ले जाने, मथुरा में प्रवेश और कंस वध की कथा सुनाकर उन्होंने कहा कि अत्याचार और अन्याय का अंत निश्चित है तथा सत्य की विजय शाश्वत है।

कथा के अंत में रुक्मिणी मंगल विवाह का प्रसंग सुनाते हुए स्वामी जी ने इसे श्रद्धा, समर्पण और निष्कपट प्रेम का दिव्य उदाहरण बताया। विवाह बधाई गीतों से पूरा पंडाल आनंद और उल्लास से गूंज उठा। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए।

इस अवसर पर स्वामी सर्वानंद जी महाराज के साथ आए उनके शिष्यों जुगल किशोर, कौशल किशोर, तनुज कुमार, रमणविहारी, भूरा भाई, श्याम पंडित और प्रशांत कुमार ने वाद्य यंत्रों पर मधुर संगत कर कथा को और अधिक भावपूर्ण बना दिया। उनके भजनों ने श्रद्धालुओं को देर तक बांधे रखा।

आयोजकों ने जानकारी दी कि श्रीमद्भागवत कथा का मंगलवार को विधिवत विराम होगा। समापन अवसर पर स्वामी सर्वानंद जी महाराज अपने आशीर्वचनों से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश देंगे तथा सभी को आशीर्वाद प्रदान करेंगे। कथा के माध्यम से समाज में संस्कार, आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है। साकची का श्री रामलीला मैदान इन दिनों भक्ति और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण का लाभ ले रहे हैं।

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