रांची। झारखंड की राजनीति में लगातार बदलते समीकरणों के बीच जमशेदपुर निवासी पूर्व मंत्री और झारखंड आंदोलनकारी रहे दुलाल भुईयां ने एक बार फिर सियासी पाला बदलते हुए भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। रविवार को रांची में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
कभी झारखंड मुक्ति मोर्चा के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले दुलाल भुईयां का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। झारखंड आंदोलन के दौर में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई और अलग राज्य की लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के नेताओं में शुमार रहे। राज्य गठन के बाद वे मंत्री पद तक पहुंचे, लेकिन समय के साथ उनकी राजनीतिक जमीन खिसकती चली गई। पिछले कुछ वर्षों में वे कई बार दल बदलते रहे और चुनावी मैदान में किस्मत आजमाते रहे, परंतु लगातार हार ने उनकी राजनीतिक स्थिति को कमजोर किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा में उनका शामिल होना केवल व्यक्तिगत राजनीतिक पुनर्वास भर नहीं है, बल्कि आदिवासी और मूलवासी समाज में अपनी पैठ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा भी है। झारखंड में आगामी चुनावी तैयारियों के बीच भाजपा संगठन को जमीनी और आंदोलनकारी छवि वाले चेहरों की जरूरत है, ऐसे में दुलाल भुईयां जैसे नेता पार्टी के लिए सामाजिक समीकरण साधने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
कार्यक्रम में बोलते हुए दुलाल भुईयां ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और भाजपा की विचारधारा से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में विकास और स्थिर शासन के लिए भाजपा ही विकल्प है। वहीं भाजपा नेताओं ने उन्हें “झारखंड आंदोलन का अनुभवी चेहरा” बताते हुए पार्टी को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम होने की बात कही।
भाजपा के लिए यह कदम ऐसे समय में अहम माना जा रहा है जब राज्य की राजनीति में गठबंधन और टूट-फूट का दौर जारी है। झामुमो और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को चुनौती देने के लिए भाजपा लगातार संगठन विस्तार और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश में जुटी है। दुलाल भुईयां की वापसी से खासकर उन इलाकों में असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है जहां वे पहले प्रभाव रखते थे।
हालांकि, विपक्ष इसे अवसरवादी राजनीति करार दे रहा है। झामुमो नेताओं का कहना है कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के कारण दल बदलने से जनाधार नहीं मिलता। लेकिन यह भी सच है कि झारखंड की राजनीति में चेहरे और जातीय-सामाजिक समीकरण अक्सर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
कुल मिलाकर दुलाल भुईयां का भाजपा में शामिल होना केवल एक व्यक्ति का दल परिवर्तन नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों से पहले झारखंड की राजनीति में नए समीकरणों की आहट के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा उन्हें संगठन में क्या जिम्मेदारी देती है और वे पार्टी के लिए कितनी राजनीतिक जमीन तैयार कर पाते हैं।

