हजारीबाग।जिले के चुरचू प्रखंड अंतर्गत गोंदवार गांव में बीती देर रात हाथियों के झुंड ने ऐसा तांडव मचाया कि पूरा इलाका शोक और दहशत में डूब गया। रात करीब एक से दो बजे के बीच पांच हाथियों का झुंड अचानक बस्ती में घुस आया और देखते ही देखते छह लोगों की जान चली गई। मृतकों में एक ही परिवार के चार सदस्य शामिल हैं, जिससे गांव का माहौल और भी गमगीन हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार सभी लोग रोज की तरह खाना खाकर गहरी नींद में सोए हुए थे। इसी दौरान अचानक जोरदार आवाज और घरों के गिरने की धमक से लोग घबराकर उठे। जब तक कोई कुछ समझ पाता, हाथियों ने कच्चे मकानों को तोड़ना शुरू कर दिया। कई घरों की दीवारें ढह गईं। जान बचाने के लिए बाहर भाग रहे लोग हाथियों की चपेट में आ गए। चारों ओर अफरा-तफरी मच गई। चीख-पुकार और भगदड़ के बीच कोई अपने बच्चों को संभाल रहा था तो कोई खुद को बचाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हाथियों का झुंड काफी देर तक गांव में उत्पात मचाता रहा।
इस दर्दनाक घटना में सूरज भूइया (55), उनकी पुतोहु सुमन देवी (25) और दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। इसके अलावा मंगरा भुईयां (58) और धनेश्वर राम (करीब 55) भी हाथियों के हमले का शिकार हो गए। जिस घर से एक ही परिवार के चार शव निकाले गए, वहां का दृश्य इतना मार्मिक था कि गांव के लोगों की आंखें नम हो गईं। एक ही झटके में पूरा परिवार उजड़ गया।
हाथियों को भगाने के लिए ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़े, बर्तन और टॉर्च का सहारा लिया। लोगों ने जोर-जोर से शोर मचाया, लेकिन हाथियों का झुंड आसानी से पीछे हटने को तैयार नहीं था। काफी मशक्कत और समय बीतने के बाद झुंड धीरे-धीरे जंगल की ओर लौट गया। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और प्रभावित परिवारों को सहायता देने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
घटना के बाद गोंदवार गांव में भय का माहौल है। कई परिवार पूरी रात जागते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही पहले भी होती रही है, जिससे फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचता रहा है, लेकिन इतनी बड़ी जनहानि पहली बार हुई है। वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से रात के समय सतर्क रहने की अपील की है।
ग्रामीणों ने मृतकों के आश्रितों को शीघ्र मुआवजा देने और हाथियों की समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि ऐसी ठोस व्यवस्था की जरूरत है जिससे भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो। प्रशासन ने हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया है, लेकिन गांव वाले अब स्थायी और प्रभावी कदम उठाए जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

