जमशेदपुर। साकची स्थित श्रीरामलीला मैदान में राम-कृष्ण मित्र मंडल ‘श्री रामलीला उत्सव ट्रस्ट’ द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रीधाम वृंदावन से पधारे पूज्य संत श्री स्वामी सर्वानंद जी महाराज ने व्यासपीठ से भागवत महापुराण की दिव्य महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और वैराग्य का संदेश दिया।
स्वामी जी ने नैमिषारण्य में हुए सूत-शौनकादि संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि जब कलियुग में जीवों के उद्धार का प्रश्न उठा, तब सूत जी ने भागवत कथा को ही परम कल्याणकारी बताया। यही संवाद आज भी मानव जीवन के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि स्वयं भगवान का साक्षात स्वरूप है, जिसका श्रवण मात्र से पापों का क्षय और अंत:करण की शुद्धि होती है।
राजा परीक्षित के शाप का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि जब परीक्षित को सात दिन में मृत्यु का श्राप मिला, तब उन्होंने राज-पाट त्यागकर गंगा तट पर संतों की शरण ली। उसी समय परमब्रह्म स्वरूप श्री शुकदेव जी का आगमन हुआ और उन्होंने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का उपदेश दिया। स्वामी जी ने कहा कि मृत्यु का भय भी यदि भगवान की शरण में ले जाए, तो वह मोक्ष का द्वार बन जाता है।
उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि उस समय देवता अमृत कलश लेकर कथा सुनने पहुंचे, किंतु उन्हें भी भागवत श्रवण का अधिकार नहीं मिला। इससे स्पष्ट होता है कि मानव जन्म अत्यंत दुर्लभ है और भागवत कथा का श्रवण उससे भी अधिक दुर्लभ। इसलिए हरि नाम, भक्ति और सत्संग ही जीवन का सच्चा धन है।
नारद भक्ति प्रसंग का वर्णन करते हुए स्वामी जी ने ज्ञान और वैराग्य की महिमा समझाई तथा आत्मदेव और धुंधकारी की कथा के माध्यम से बताया कि अधर्म और विषय-वासनाओं से भटकने वाला भी यदि सच्चे मन से भक्ति का आश्रय ले, तो उसका उद्धार संभव है। कथा के दौरान श्रद्धालु “हरि बोल” और “राधे-श्याम” के जयघोष से वातावरण गुंजायमान करते रहे।
इस अवसर पर डॉ. डीपी शुक्ला, शंकर लाल सिंघल, अनिल कुमार चौबे, मनोज कुमार मिश्रा, मगन पांडेय, सुरेश पांडेय, अवधेश मिश्रा, सुभाष चंद्र शाह, दिलीप तिवारी, प्रदीप चौधरी, नीरज तिवारी सहित अनेक गणमान्यजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन समिति ने बताया कि आगामी दिनों में भी प्रतिदिन कथा का आयोजन जारी रहेगा।

