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Wed. Feb 11th, 2026

नाबालिग से दुष्कर्म मामले में निरंजन शर्मा को 21 वर्ष का कठोर कारावास

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 2020 में दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म के बहुचर्चित मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय सह विशेष पोक्सो न्यायाधीश संतोष आनंद की अदालत ने अभियुक्त निरंजन शर्मा को दोषी करार देते हुए 21 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

यह मामला जगन्नाथपुर थाना कांड संख्या 58/2020, दिनांक 20 जुलाई 2020 के रूप में दर्ज किया गया था। प्राथमिकी के अनुसार जैतगढ़ निवासी निरंजन शर्मा, पिता स्वर्गीय सरयू शर्मा, पर आरोप था कि उसने एक नाबालिग बच्ची के साथ जबरन दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने थाना में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

अनुसंधान के दौरान पुलिस ने पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया तथा वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए। केस डायरी, मेडिकल रिपोर्ट, पीड़िता का बयान तथा अन्य गवाहों के आधार पर सुदृढ़ आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया गया। मामला पोक्सो केस संख्या 17/2021 के रूप में न्यायालय में विचाराधीन रहा।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य और गवाहों के माध्यम से आरोपों को प्रमाणित किया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 तथा पोक्सो एक्ट की प्रासंगिक धाराओं के तहत दोषी पाया। 11 फरवरी 2026 को सुनाए गए फैसले में न्यायालय ने पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 21 वर्ष के कठोर कारावास की सजा निर्धारित की।

अदालत के इस निर्णय के साथ लगभग साढ़े पांच वर्ष से लंबित इस मामले का निष्पादन हो गया। न्यायालय के फैसले को बाल संरक्षण कानूनों के तहत एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

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