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Sat. Feb 7th, 2026

शीर्षक: डॉक्टर एवं स्टाफ की अभद्र टिप्पणी पर भड़के विकास कुमार, अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला

जमशेदपुर एमजीएम अस्पताल में उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब एनेस्थीसिया विभाग के एक डॉक्टर द्वारा मरीज के परिजनों के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया। आरोप है कि डॉक्टर ने प्रखर समाजसेवी विकास कुमार के साथ बातचीत के दौरान अमर्यादित व्यवहार किया जिससे आहत होकर विकास कुमार ने डॉक्टर के इस दुर्व्यवहार के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।

क्या है पूरा मामला:

विकास कुमार ने बताया कि वे कपाली निवासी राज खान जिसकी सड़क दुर्घटना में बाएं पैर की हड्डी तीन टुकड़े में टूट गई आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिजनों ने जदयू नेता एवं प्रखर समाजसेवी से मदद की गुहार लगाई स्टील रॉड एवं अन्य सामग्री का भुगतान श्री विकास ने अपने निजी खर्चों से वहन कर

उपचार के संबंध में डॉक्टर से परामर्श ले रहे थे। इसी दौरान एनेस्थीसिया डॉक्टर ने संवेदनशीलता की सभी हदें पार करते हुए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। विकास कुमार ने इस व्यवहार को केवल अपना अपमान नहीं, बल्कि पूरे समाज और मरीजों के सम्मान के खिलाफ बताया।

विकास कुमार का कड़ा रुख:

डॉक्टर की इस हरकत पर चुप बैठने के बजाय विकास कुमार ने अस्पताल परिसर में ही इसका कड़ा विरोध किया और अस्पताल प्रशासन से लिखित माफी व कार्रवाई की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सा जैसा पवित्र पेशा गाली-गलौज या अपमान के लिए नहीं है। विकास कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि डॉक्टर के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई नहीं की गई, तो वे इस मामले को स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों तक ले जाएंगे।

अस्पताल प्रशासन की चुप्पी:

इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक तनाव का माहौल बना रहा। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने मामले को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन विकास कुमार अपनी मांगों पर अड़े रहे। स्थानीय नागरिकों ने भी विकास कुमार के इस साहसी कदम का समर्थन किया है।

मामला सामने आने के बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. नकुल प्रसाद चौधरी ने ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर वी. चंद्रा से फोन पर बात कर जल्द ऑपरेशन कराने का निर्देश दिया। अधीक्षक ने यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल के पास पर्याप्त फंड नहीं है, इसी कारण मरीजों से कुछ सामग्री मंगाई जा रही है। हालांकि, इसके बावजूद अवैध वसूली के आरोपों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

अधीक्षक के निर्देश के बाद जब परिजन और पत्रकार ऑपरेशन थिएटर पहुंचे तो वहां होम गार्ड द्वारा उन्हें हटाने की कोशिश की गई। आरोप है कि इसके बाद अस्पताल कर्मचारियों और नर्सों ने खुलेआम धमकाना शुरू कर दिया और कहा कि अस्पताल में पानी, ब्लड और अन्य संसाधनों की कमी है, इसलिए ऑपरेशन संभव नहीं है। पहले ब्लड लाने के लिए कहा गया, फिर ऑपरेशन की तारीख आगे बढ़ा दी गई।

परिजनों का आरोप है कि पहले शुक्रवार को ऑपरेशन की बात कही गई थी फिर तारीख बढ़ाकर बुधवार को कर दिया गया इससे साफ होता है कि मरीज को जानबूझकर मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जा रहा है।

यह पूरा मामला सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज के नाम पर मरीजों से अवैध वसूली और उन्हें परेशान करने की गंभीर तस्वीर पेश करता है। सवाल यह उठता है कि जब गरीब और असहाय मरीज इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं, तब ऐसी संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार पर आखिर कब कार्रवाई होगी।

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