गुवा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा क्षेत्र में सेल (SAIL) प्रबंधन द्वारा नई रांजाबुरु लौह अयस्क खदान खोलने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के साथ ही इलाके में विरोध तेज हो गया है। खदान से सीधे प्रभावित होने वाले सात गांवों के ग्रामीणों ने इसे अपने अस्तित्व, अधिकार और कानून के खिलाफ बताते हुए खुला आंदोलन छेड़ने का एलान कर दिया है। 6 फरवरी को कासिया-पेंचा गांव में सामाजिक कार्यकर्ता मंगता सुरीन की अध्यक्षता में आयोजित विशाल बैठक में कासिया-पेंचा, गंगदा, घाटकुड़ी, जोजोगुट्टू, राजबेड़ा, बाईहातु और तितलीघाट गांवों के मुंडा, ग्रामीण पुरुष और महिलाएं सैकड़ों की संख्या में शामिल हुए।
बैठक में ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की कि रांजाबुरु खदान में सौ फीसदी प्रभावित गांवों के बेरोजगार युवकों को स्थायी और अस्थायी रोजगार दिया जाए, अन्यथा खदान को हमेशा के लिए बंद कराया जाएगा। ग्रामीणों का कहना था कि सेल प्रबंधन आदिवासियों को केवल जमीन देने वाला मान रहा है, जबकि खदान से होने वाले मुनाफे का कोई लाभ गांवों को नहीं मिल रहा। इसके बदले धूल, प्रदूषण, बीमारियां, बेरोजगारी और विस्थापन जैसी समस्याएं झेलनी पड़ेंगी।
बैठक में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT एक्ट) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT एक्ट) के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया गया कि क्या ग्रामसभा की लिखित सहमति के बिना ही खदान की प्रक्रिया शुरू की गई है। ग्रामीणों ने पुनर्वास, मुआवजा और पर्यावरण नियमों के पालन को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की।
मंगता सुरीन ने कहा कि CNT और SPT एक्ट आदिवासियों की ढाल हैं और इन्हें तोड़कर कोई भी खदान नहीं चल सकती। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को कानूनी और जनांदोलन दोनों रूपों में तेज किया जाएगा। बैठक में मुंडा नंदलाल सुरीन, मुंडा कानूराम देवगम, मंगता सुरीन, राजेश साड़ील, सूरदन सुरीन, पवन चांपिया, हरि चांपिया, जादू सुरीन, बामिया सुरीन, सागूराम सुरीन, चरण सुरीन सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे। ग्रामीणों के तेवर को देखते हुए रांजाबुरु खदान को लेकर हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।

