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Wed. Feb 4th, 2026

ऑनलाइन गेम का खौफनाक अंत: तीन बहनों ने थामा एक-दूसरे का हाथ, 9वीं मंजिल से कूदकर खत्म की जिंदगी

उत्तर प्रदेश। दिल्ली की राजधानी से सटे गाजियाबाद के भारत सिटी (Bharat City) हाई-राइज सोसाइटी के बी-1 टावर, फ्लैट नंबर 907 में मंगलवार रात एक ऐसी अमानवीय त्रासदी घटी, जिसने डिजिटल दुनिया के काले पक्ष को नंगा कर दिया। 12 वर्षीय निशिका, 14 वर्षीय प्राची और 16 वर्षीय पाखी—तीन सगी बहनें—रात करीब 2 बजे एक-दूसरे का हाथ कसकर पकड़े 9वीं मंजिल की बालकनी से कूद पड़ीं। लगभग 80 फीट की ऊंचाई से धड़ाम की आवाज के साथ तीनों ग्राउंड पर बेसुध गिर पड़ीं। सोसाइटी में चीखें गूंज उठीं, और एक खुशहाल परिवार का आशियाना मातम में डूब गया। थाना टीलामोड़ पुलिस ने पीआरवी (पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल) के जरिए सूचना पाकर तुरंत मौके पर पहुंची। एम्बुलेंस से तीनों को 50 शैय्या अस्पताल लोनी ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

डायरी में छिपा टूटा दिल: सुसाइड नोट ने सबको रुला दिया

जांच के दौरान पुलिस को बहनों के कमरे से एक डायरी मिली, जिसमें भावुक सुसाइड नोट लिखा था—’मम्मी-पापा सॉरी… हम इस गेम को नहीं छोड़ पा रही हैं। अब आपको यह एहसास होगा कि हम इस गेम से कितना प्यार करती थीं, जिसे आप हमसे छुड़वाना चाहते थे।’ एक अलग पेज पर सिर्फ ‘मम्मी पापा सॉरी’ के शब्द… ये आंसू भरे शब्द उस मानसिक आगोश को बयां करते हैं, जो गेम के क्रूर टास्कों ने रचा। पिता चेतन कुमार, जो ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग से गुजारा करते हैं, आंसुओं में भीगते हुए बताते हैं, ‘मेरी बच्चियां कोरोना महामारी से इस ‘कोरियन लव गेम’ की गिरफ्त में थीं। गेम में कुल 50 टास्क थे, और घटना वाले दिन आखिरी टास्क था—शायद यही मौत का फंदा। कूदने के लिए उन्होंने दो स्टेप वाली सीढ़ी का सहारा लिया। अगर मुझे टास्कों का पता होता, तो कभी गेम खेलने न देते। हाल ही में मैंने लत पर फटकार लगाई और मोबाइल छीन लिया, यही गुस्सा आखिरी कदम बन गया। कोई मां-बाप अपने बच्चों को ऐसी जहर भरी दुनिया में न धकेलें।

”कोरियन लव गेम’ का खतरनाक जाल: कैसे फंसाता है मासूमों को?

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह गेम एक टास्क-बेस्ड ऑनलाइन चैट प्लेटफॉर्म है, जो अज्ञात यूजर्स द्वारा संचालित होता है। ये लोग खुद को कोरियन लड़के-लड़कियां या विदेशी दोस्त बताकर चैट शुरू करते हैं। शुरुआत में प्यार भरी बातें, गिफ्ट्स के वादे और हल्के-फुल्के टास्क (जैसे फोटो शेयर करना) से खिलाड़ी को ललचाते हैं। धीरे-धीरे टास्क खतरनाक हो जाते हैं—रात भर जागना, खतरनाक जगहों पर जाना, या खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे आदेश। मानसिक दबाव इतना बढ़ जाता है कि बच्चे परिवार-दुनिया भूलकर गेम को अपनी हकीकत मान लेते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में पिछले दो वर्षों में ऐसे 20 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं, जहां गेमिंग लत ने युवाओं को आत्महत्या की ओर धकेला। एसीपी अतुल कुमार ने पुष्टि की कि बहनों के मोबाइल फोन जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि चैट हिस्ट्री और मास्टरमाइंड का पता लगे। एडिशनल पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) आलोक प्रियदर्शी ने कहा, ‘ऐसे गेम्स साइबर क्राइम का रूप हैं। हम सख्त कार्रवाई करेंगे।

‘माता-पिता जागें: लत के ये लक्षण नजरअंदाज न करें

मनोवैज्ञानिक डॉ. रवि शर्मा बताते हैं, ऑनलाइन गेम लत के शुरुआती संकेत हैं—व्यवहार में चिड़चिड़ापन, दोस्तों-परिवार से कट जाना, रात 2-3 बजे तक मोबाइल चिपके रहना, पढ़ाई-अन्य कामों में रुचि खत्म होना, नींद-भूख में कमी। भारत में 10-18 साल के 15% बच्चे गेमिंग लत के शिकार हैं (NCMH रिपोर्ट)। चेतन की पत्नी ने बताया, ‘बेटियां पहले खुशमिजाज थीं, लेकिन पिछले छह महीनों से बदरंग हो गईं।’ यह घटना पूरे देश के लिए चेतावनी है।

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