जमशेदपुर। जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र के उत्तरी सरजमदा पंचायत अंतर्गत सरजमदा गुरुद्वारा के समीप सरकारी भूमि पर बन रहे सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य बुधवार को स्थानीय ग्रामीणों के कड़े विरोध के बाद बंद कर दिया गया। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर काम रुकवाया और प्रशासन व जनप्रतिनिधियों पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया।
ग्रामीणों एवं ग्राम प्रधान का कहना है कि विधायक निधि से प्रस्तावित इस सामुदायिक भवन के निर्माण से पूर्व न तो ग्राम सभा का आयोजन किया गया और न ही पंचायत या गांव के लोगों को किसी प्रकार की आधिकारिक जानकारी दी गई। इसी बात से नाराज होकर सुरेंद्र मांझी, मनोज हांसदा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया और निर्माण कार्य तत्काल बंद करा दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सभा गांव का सर्वोच्च निर्णय मंच है और बिना उसकी सहमति किसी भी सार्वजनिक भूमि पर निर्माण कार्य करना नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल्द ही ग्राम सभा का आयोजन कर पूरे मामले की जानकारी गांववासियों के सामने रखी जाएगी और सामूहिक निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इस बीच स्थानीय ग्रामीण सुरेंद्र महतो ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस स्थान पर सामुदायिक भवन का निर्माण किया जा रहा है, वह वर्षों से गांव का आवागमन मार्ग रहा है। उनका आरोप है कि कुछ लोग जानबूझकर इस रास्ते को बंद करने की नीयत से भवन निर्माण कराना चाहते हैं, जिससे ग्रामीणों को भविष्य में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार संबंधित भूमि सरकारी है, जिसका प्लॉट नंबर 1201 और 1205 तथा खाता नंबर 479 बताया गया है। इस भूमि को प्रजापति समाज के लिए सामुदायिक भवन निर्माण हेतु विधायक मंगल कालिंदी की अनुशंसा पर जमशेदपुर अंचल प्रशासन द्वारा आवंटित किया गया था। जमीन पर सरकारी बोर्ड भी लगाया गया है, जिससे आवंटन की पुष्टि होती है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि इससे पहले इस जमीन पर भू-माफियाओं की नजर थी और अतिक्रमण की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने इसे सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सामुदायिक भवन निर्माण के लिए आवंटित किया। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों का तर्क है कि अतिक्रमण रोकने के नाम पर गांव के रास्ते और ग्राम सभा की भूमिका की अनदेखी नहीं की जा सकती।
फिलहाल ग्रामीणों के विरोध के बाद निर्माण कार्य पूरी तरह बंद है। अब सभी की निगाहें प्रस्तावित ग्राम सभा की बैठक और प्रशासन द्वारा लिए जाने वाले अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि ग्राम सभा में सहमति या आपत्ति के बाद ही इस सामुदायिक भवन के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला हो सकेगा।

