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Fri. Jan 9th, 2026

गांजा तस्करी व चोरी की बाइक रखने के दोषी तीन अभियुक्तों को चार साल की सजा, जुर्माना भी लगाया

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले में मादक पदार्थों की तस्करी और चोरी की संपत्ति रखने के मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक पुराने मामले में गुरुवार को तीन अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। मुफ्फसिल थाना कांड संख्या 114/2018 से जुड़े इस मामले में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि समाज को नशे और संगठित अपराध से मुक्त करने के लिए कानून पूरी कठोरता के साथ लागू किया जाएगा।

यह मामला 30 अगस्त 2018 को दर्ज किया गया था, जब पुलिस को गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई के दौरान अभियुक्तों के पास से गांजा बरामद हुआ था। इसी क्रम में उनके कब्जे से एक चोरी की पल्सर मोटरसाइकिल भी मिली थी। पुलिस जांच में यह सामने आया कि अभियुक्त न सिर्फ अवैध रूप से मादक पदार्थ रख रहे थे, बल्कि चोरी की मोटरसाइकिल को भी छिपाकर इस्तेमाल कर रहे थे। मामले में भारतीय दंड विधान की धारा 413, 414 एवं 34 तथा एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(ii) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

इस कांड में अभियुक्त संजीव कुमार देवगम, पिता बृजमोहन देवगम, निवासी सूर्यवासा (थाना झींकपानी), विकास सवैया, पिता सुधांशु सवैया, निवासी वासाहातु (थाना झींकपानी) तथा खैमकरन विरुवा, पिता स्वर्गीय दीगुवर विरुवा, निवासी मेरोमहनर (थाना मंझारी), जिला पश्चिमी सिंहभूम को आरोपी बनाया गया था। अनुसंधान के दौरान चाईबासा पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा और मामले से संबंधित सभी साक्ष्य, जब्ती सूची, गवाहों के बयान एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों को संकलित करते हुए आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया।

इसके बाद एनडीपीएस केस संख्या 04/2018 के तहत मामले का नियमित विचारण चला। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने अभियुक्तों को दोषी पाया। सुनवाई पूरी होने के बाद 8 जनवरी 2026 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम, पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा ने अपना फैसला सुनाया।

न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों को भारतीय दंड विधान की धारा 414 के तहत तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास तथा एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(ii) के तहत एक-एक वर्ष का कारावास सुनाया। इसके साथ ही प्रत्येक अभियुक्त पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में अतिरिक्त सजा का प्रावधान भी रखा गया है।

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