चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में मंगलवार को उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी चंदन कुमार की अध्यक्षता में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) की जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित स्वयं सहायता समूहों, पलाश दीदी कैफे, पलाश मार्ट और समूह आधारित आजीविका गतिविधियों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा आगामी कार्ययोजनाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, सहायक समाहर्ता सिद्धांत कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती आशियानी मड़की सहित सभी प्रखंडों के प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक और जिला स्तर की तकनीकी टीम उपस्थित रही। उपायुक्त ने चाईबासा और चक्रधरपुर में स्वीकृत पलाश मार्ट की वर्तमान स्थिति, जिले के प्रत्येक गांव में स्वयं सहायता समूहों के क्रियान्वयन तथा डीएमएफटी के माध्यम से जेएसएलपीएस को दिए गए प्रोजेक्ट्स के संचालन और आर्थिक संयोजन से संबंधित प्रतिवेदनों की गहन समीक्षा की।
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिले के सभी प्रखंड कार्यालयों और जिला समाहरणालय परिसर में पलाश दीदी कैफे का शीघ्र अधिष्ठापन एवं सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही जिले के विभिन्न आवासीय विद्यालय परिसरों में उपलब्ध खाली भूमि पर नियमित रूप से सब्जी की खेती शुरू करने और कुछ चयनित प्रखंडों में मसाला उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव तैयार करने तथा संबंधित स्वयं सहायता समूहों का चयन करने का निर्देश दिया गया।
बैठक के दौरान बताया गया कि जेएसएलपीएस के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आजीविका के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना है। जिले में वर्तमान में कुल 75 क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) और 15,609 स्वयं सहायता समूह गठित किए जा चुके हैं, जिनमें से 14,473 समूहों को प्रथम किस्त के रूप में आर्थिक संयोजन उपलब्ध कराया गया है।
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि आर्थिक संयोजन प्राप्त सभी स्वयं सहायता समूहों द्वारा वर्तमान में संचालित आजीविका गतिविधियों की विस्तृत सूची तैयार की जाए। साथ ही प्रत्येक पंचायत में 20 से 25 स्वयं सहायता समूहों का चयन कर समूह आधारित आर्थिक गतिविधि निर्धारित करते हुए चरणबद्ध तरीके से एक-एक समूह को आर्थिक रूप से सशक्त किया जाए, ताकि महिलाओं की आय में स्थायी वृद्धि हो सके।
अंत में उपायुक्त ने जिला कार्यक्रम प्रबंधक को निर्देश दिया कि इन सभी कार्यों से संबंधित समेकित प्रतिवेदन 21 जनवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाए, ताकि जिले में महिला आधारित आजीविका योजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

