जमशेदपुर। जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय के जनसुविधा प्रतिनिधि पप्पू सिंह, पिंटू सिंह और संतोष भगत ने मानगो नगर निगम पर विकास कार्य कराने में पूरी तरह विफल रहने का आरोप शुक्रवार को लगाया है। उन्होंने कहा कि मानगो में नगर विकास विभाग की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं और धरातल पर एक भी काम नजर नहीं आ रहा है। इसे लेकर तीनों प्रतिनिधियों ने उपायुक्त से मिलने और ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करने की घोषणा की है।
जारी संयुक्त बयान में जनसुविधा प्रतिनिधियों ने कहा कि 17 फरवरी 2025 को योजना चयन समिति की बैठक के बाद मानगो नगर निगम के माध्यम से 25 अगस्त 2025 को कई विकास योजनाओं की निविदाएं निकाली गईं, लेकिन चार महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद किसी भी योजना का काम शुरू नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब निविदाएं निकाली गई थीं तो 120 दिनों में उनका निपटारा क्यों नहीं हुआ और आखिर इन्हें रोक कौन रहा है। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि उप नगर आयुक्त की भूमिका संदिग्ध है और उनके द्वारा किसी न किसी बहाने योजनाओं को आगे बढ़ने से रोका जा रहा है, जिससे मानगो की जनता विकास से वंचित हो रही है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद योजना चयन समिति में जिन-जिन योजनाओं को स्वीकृति मिली, उनमें से जिन पर टेंडर हुए, वे भी आज तक धरातल पर नहीं उतरीं। कई बार निविदाएं निकाली गईं और फिर उन्हें रद्द कर दिया गया, लेकिन अंततः काम शुरू नहीं हो पाया। इस स्थिति से जनता में भारी आक्रोश है, जबकि नगर निगम के पदाधिकारी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। बार-बार पत्राचार के बावजूद न तो जवाब मिला और न ही काम की प्रगति हुई।
जनसुविधा प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि उप नगर आयुक्त मानगो नगर निगम कार्यालय में नियमित रूप से बैठते ही नहीं हैं। ऐसे में आम लोग और जनप्रतिनिधि उनसे मिल भी नहीं पाते। उन्होंने कहा कि जब अधिकारी कार्यालय में मौजूद ही नहीं रहेंगे तो जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरे वित्तीय वर्ष के समाप्त होने को है, लेकिन विकास कार्यों पर एक भी रुपये का खर्च नहीं किया गया है।
बयान में यह जानकारी भी दी गई कि शहरी पथ परिवहन मद के तहत कुल 56 योजनाओं की निविदा लगभग 5 करोड़ 71 लाख 74 हजार 980 रुपये की निकाली गई, जबकि नागरिक सुविधा मद के अंतर्गत 23 योजनाओं की निविदा करीब 2 करोड़ 62 लाख 35 हजार 537 रुपये की हुई थी। बावजूद इसके, कोई भी योजना जमीन पर उतरती नजर नहीं आ रही है। तीनों प्रतिनिधियों ने उपायुक्त से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मानगो की जनता को विकास कार्यों का लाभ दिलाने के लिए शीघ्र ठोस कदम उठाए जाएं।

