जमशेदपुर। सीतारामडेरा थाना क्षेत्र के भुईयाडीह में संविधान दिवस के दिन हुए तोड़फोड़ अभियान को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार की रात पूर्व मंत्री दुलाल भुईयां के नेतृत्व में प्रभावित परिवारों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना, पुनर्वास की व्यवस्था या लिखित आदेश दिखाए अचानक लगभग साठ घरों को ढहा दिया गया, जिससे सैकड़ों लोग कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए टाटा स्टील प्रबंधन और जिला प्रशासन से मांग की कि उन्हें वह लिखित आदेश दिखाया जाए, जिसके आधार पर घरों को ध्वस्त किया गया। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने न तो बातचीत की, न नोटिस दिया और न ही वैकल्पिक व्यवस्था की—सरकार की योजनाओं और मानवता के विपरीत जाकर अचानक तोड़फोड़ की गई।
पूर्व मंत्री दुलाल भुईयां ने कहा कि भुईयाडीह बस्ती की अपनी ऐतिहासिक पहचान है। उन्होंने याद दिलाया कि स्वर्गीय शिबू सोरेन भी कई बार इस बस्ती में आए थे और यहां के लोगों के साथ गहरा संबंध रखते थे। इसके बावजूद इस तरह की कार्रवाई करना न केवल अमानवीय है बल्कि शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने साफ कहा कि वे सड़क चौड़ीकरण का विरोध नहीं करते, लेकिन किसी भी विकास कार्य से पहले वैकल्पिक व्यवस्था और बस्तीवासियों को समय देना जरूरी होता है, जिसे प्रशासन ने पूरी तरह नजरअंदाज़ कर दिया।
दुलाल भुईयां ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध किया कि वे स्वयं मौके पर आकर देखें कि किस तरह सर्द हवाओं के बीच दर्जनों परिवार खुले में रात गुजार रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रभावित लोगों को पुनर्वास नहीं दिया गया और प्रशासन अपने निर्णय की लिखित प्रति उपलब्ध नहीं कराता, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि कार्रवाई टाटा स्टील की भूमि से संबंधित थी, तो टाटा स्टील और जिला प्रशासन को पहले बातचीत करनी चाहिए थी। बस्तीवासियों के अनुसार, कई परिवार यहां पिछले कई दशक से रह रहे हैं और उनके पास पहचान पत्र तथा सरकारी दस्तावेज भी मौजूद हैं।
प्रदर्शन के बाद भी मौके पर तनाव की स्थिति बनी हुई है, और प्रभावित परिवार न्याय की मांग पर अड़े हुए हैं। प्रशासन की ओर से हालांकि अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

