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चांडिल डैम में विदेशी परिंदों का मेला, प्रवासी पक्षियों के आगमन से गूंजा पूरा क्षेत्र

चांडिल।सरायकेला-खरसावां जिला में सर्द हवाओं की दस्तक के साथ चांडिल डैम का शांत जलाशय एक बार फिर हजारों किलोमीटर दूर साइबेरिया और उत्तरी एशिया से आए प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार हो उठा है। हर साल की तरह इस बार भी विदेशी परिंदों का आगमन शुरू हो चुका है, जिनके मनमोहक नज़ारों को देखने के लिए स्थानीय लोगों से लेकर बाहर से आए पर्यटकों तक की भीड़ उमड़ रही है। सर्द मौसम, आसपास फैली पहाड़ियां और जलाशय की नीरवता इन परिंदों की आवाज़ों से एक बार फिर जीवंत हो गई है।

वन विभाग के रेंज ऑफिसर शशि रंजन प्रकाश ने बताया कि इस साल प्रवास का रुझान उम्मीद से बेहतर है। नवंबर की शुरुआत से ही प्रवासी पक्षियों का आगमन दिखने लगा था, जबकि दिसंबर में संख्या तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि जनवरी-फरवरी में इनकी संख्या चरम पर होगी। शुरुआती अवलोकन बताता है कि इस बार पक्षियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रह सकती है, जो पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से भी सकारात्मक संकेत है।

रेंज ऑफिसर के अनुसार इस समय डैम परिसर में बार-हेडेड गूज, गैडवॉल, टफ्टेड डक, रेड-क्रेस्टेड पॉकर्ड, कॉमन टील, पिनटेल डक और शॉवलर जैसी कई प्रमुख प्रजातियां देखी जा रही हैं। तापमान में और गिरावट आने पर इनके झुंड और बढ़ने की संभावना है। कुछ स्थानीय पक्षी जैसे कॉर्मोरेंट (जलकाग), एग्रेट (बगुला) और किंगफिशर भी इनके साथ जलाशय में सक्रिय नज़र आ रहे हैं, जिससे पूरा इलाका पक्षियों का स्वर्ग बन गया है।

चांडिल डैम में पक्षियों के आगमन ने पर्यटन को भी नई ऊर्जा दे दी है। नौका-विहार का रोमांच और प्रवासी पक्षियों को करीब से देखने का अवसर पर्यटकों को खींच रहा है। नावों पर बैठे लोगों को कभी तैरते हुए और कभी अचानक उड़ान भरते परिंदों के झुंड रोमांचित कर रहे हैं। पर्यटक मोबाइल और कैमरों से इन दुर्लभ पलों को कैद करने में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं।

इधर, डैम निर्माण के दौरान विस्थापित हुए कई परिवार आज चांडिल डैम क्षेत्र में नौका सेवा, फूड स्टॉल और स्थानीय हस्तशिल्प की दुकानों का संचालन करते हैं। प्रवासी पक्षियों का मौसम इन परिवारों की आजीविका का सबसे बड़ा सहारा माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिसंबर से फरवरी तक पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है, जिससे उनकी आमदनी लगभग दोगुनी हो जाती है। यह सीजन पूरे क्षेत्र की छोटी-बड़ी दुकानों, नाव संचालकों और स्थानीय उत्पाद विक्रेताओं के लिए आर्थिक मजबूती का समय होता है।

वन विभाग का कहना है कि प्रवास का सिलसिला नवंबर से शुरू होकर फरवरी तक चरम पर रहता है। मार्च में तापमान बढ़ने के साथ लौटने का क्रम शुरू हो जाता है। आने वाले दो महीने चांडिल डैम में बर्ड-वॉचिंग के लिए सबसे सुंदर समय माना जा रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य और विदेशी पक्षियों के मनमोहक कलरव का आनंद लेने के लिए दूर-दराज के जिलों से पर्यटकों का आना जारी है, जिससे चांडिल डैम एक बार फिर सर्दियों का प्रमुख पर्यटन केंद्र बन गया है।

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