जमशेदपुर। बुधवार को आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामुदायिक ज्ञान को एक साझा मंच पर लाने वाले बहुप्रतीक्षित आयोजन ‘संवाद 2025’ का बुधवार को भव्य समापन हुआ। तीन दिनों तक चली इस यात्रा ने संवाद, विचार-विमर्श, कला, उपचार परंपराओं और सामुदायिक अनुभवों को जोड़ते हुए आदिवासी जीवन की जड़ों को नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम का अंतिम दिन भी विविध सत्रों, प्रेरक प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक उत्सवों से सराबोर रहा।
अखड़ा में आयोजित सत्र में प्रतिभागियों ने सामाजिक परिवर्तन और सामुदायिक कार्रवाई के बीच के तालमेल पर चर्चा की। कला और हस्तशिल्प के मंच पर आदिवासी डिज़ाइन, प्रस्तुति और नवाचार के बदलते स्वरूपों पर बात हुई। पारंपरिक उपचार पद्धतियों पर केंद्रित सत्र में भोजन के औषधीय गुणों और स्वदेशी ज्ञान की महत्ता पर गहन चर्चा हुई। वहीं समुदाय-केंद्रित बातचीत में उन विचारों को स्थान मिला, जिनसे आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक कहानियाँ आकार लेती हैं।
इस अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन के सीईओ सौरव रॉय ने प्रतिष्ठित संवाद फेलोशिप 2025 के लिए चुने गए 9 फेलो की घोषणा की। ये चयन देशभर से आए 572 आवेदकों में से किए गए थे, जो 25 राज्यों, दो केंद्र शासित प्रदेशों और 122 जनजातियों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। चयन प्रक्रिया का संचालन प्रतिष्ठित जूरी ने किया, जिसमें डॉ. सोनम वांगचुक, मीनाक्षी मुंडा, ओइनम डोरेन, परमानंद पटेल और मदन मीणा शामिल थे।
सांस्कृतिक संध्या में मुंडा, कूकी, गारो और कंधा जनजातियों के कलाकारों ने अपने पारंपरिक नृत्य और गीतों से वातावरण को जीवंत कर दिया। आगे गरिमा एक्का और अर्जुन लकड़ा की नागपुरी धुनों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
गोपाल मैदान स्थित आदिवासी भोजन, कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक उपचार के स्टॉलों ने भी आगंतुकों को खूब आकर्षित किया। घरेलू रसोइयों द्वारा तैयार व्यंजनों और शिल्पकारों की प्रामाणिक कृतियों ने संवाद 2025 को सांस्कृतिक विविधता और आदिवासी अस्मिता का उत्कृष्ट उत्सव बना दिया।

