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Wed. Mar 4th, 2026

चांडिल में नवनिर्मित विवेकानंद केंद्र ‘प्रकल्प भवन’ का उद्घाटन, राज्यपाल बोले—सेवा और संस्कार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

चांडिल।सरायकेला-खरसावां जिला स्थित चांडिल में बुधवार को माननीय राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार चांडिल में नव निर्मित विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी सेवा एवं प्रशिक्षण ‘प्रकल्प भवन’ के उद्घाटन समारोह और ‘साधना दिवस’ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि यह भवन केवल एक संरचना नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्रधर्म की भावना पर आधारित एक जीवंत केंद्र है, जहाँ से समाज परिवर्तन की नई दिशा विकसित होगी। उन्होंने इसे चांडिल ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड–बिहार क्षेत्र में सेवा, संस्कार और समाज-निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।

राज्यपाल ने कहा कि आज का दिन ‘साधना दिवस’ है, जो विवेकानंद केंद्र के संस्थापक एकनाथ रानाडे जी की जयंती को समर्पित है। उन्होंने युगपुरुष स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र का मूल उद्देश्य आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित मानव निर्माण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सेवा भवन युवाओं में चरित्र निर्माण, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत करेगा।

उन्होंने झारखंड की जनजातीय संस्कृति, प्रकृति-प्रेम और सामुदायिक सौहार्द को राज्य की अनमोल धरोहर बताया। राज्यपाल ने कहा कि इस सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ना समय की प्रमुख आवश्यकता है, और इस दिशा में विवेकानंद केंद्र का चांडिल प्रकल्प महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

राज्यपाल गंगवार ने कहा कि स्वामी विवेकानंद शिक्षा को केवल पाठ्यज्ञान नहीं, बल्कि “चरित्र निर्माण की प्रक्रिया” मानते थे। उन्होंने केंद्र के कार्यकर्ताओं द्वारा ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, संस्कार और सेवा गतिविधियों को “नर सेवा ही नारायण सेवा” की भारतीय परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

अपने संबोधन में उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रनिर्माण और सेवा पर आधारित शासन व्यवस्था स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं के अनुरूप है। राज्यपाल ने कहा कि यह नव निर्मित सेवा भवन भी इसी भावना को और सशक्त करेगा।

कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक ज्ञान, तकनीक और कौशल से स्वयं को सशक्त बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह ‘प्रकल्प भवन’ आने वाले समय में मानव निर्माण, सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

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