जमशेदपुर। स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट और नेचर फाउंडेशन के तत्वावधान में बुधवार को आयोजित चतुर्थ बालमेला 2025 के छठे दिन “डिजिटल युग में बचपन” और “सोशल मीडिया व पहचान का संकट” विषय पर भाषण प्रतियोगिता हुई। प्रतियोगिता बच्चों के मंथन का केंद्र बनी, जहां प्रतिभागियों ने बेबाकी से डिजिटल दुनिया के दुष्प्रभावों पर विचार रखे। कई प्रतिभागियों ने कहा कि आज के बच्चे अकेलापन, तनाव, अवसाद और चिड़चिड़ेपन की गिरफ्त में हैं। खेल के मैदान की जगह मोबाइल ने ले ली है और बच्चे वास्तविक खेलों से दूर होते जा रहे हैं। कुछ वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल युग ने पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में दूरी ला दी है। पहले जहां बच्चे सुबह उठकर दोस्तों संग खेलते थे, वहीं अब चैटिंग और वीडियो कॉल में पूरा समय बीत रहा है।
प्रतिभागियों का मानना था कि डिजिटल जीवन ने बच्चों का शारीरिक स्वास्थ्य कमजोर किया है और स्क्रीन टाइम 4 से 6 घंटे तक पहुंच गया है। वास्तविक और डिजिटल—दो अलग-अलग दुनिया बन गई हैं, जिसमें बच्चे वर्चुअल दुनिया के गुलाम होते जा रहे हैं। कई बच्चों ने पुस्तक संस्कृति के खत्म होते जाने, मिट्टी की खुशबू और खेल के मैदानों से दूरी को सबसे बड़ी हानि बताया।
सोशल मीडिया को प्रतिभागियों ने सबसे अधिक खतरनाक करार दिया। उनका कहना था कि यह युवाओं की पर्सनालिटी को बिगाड़ रहा है, फूहड़ प्रेम-प्रदर्शन और दिखावे की संस्कृति बढ़ा रहा है। फर्जी प्रोफाइल, साइबर अपराध और गलत जानकारी बच्चों को भ्रमित कर रहे हैं। बच्चों ने चेताया कि सोशल मीडिया को समझदारी से इस्तेमाल करना ही सही रास्ता है।
कक्षा 9-10 समूह में रितु कुमारी प्रथम, श्रद्धा गोसाईं द्वितीय और अभिजीत पांडेय तृतीय स्थान पर रहे। वहीं कक्षा 11-12 में काजल कुमारी ने प्रथम स्थान हासिल किया, रौशनी कुमारी द्वितीय और लक्ष्मी महतो तृतीय रहीं। विजेताओं को रिटायर्ड आईपीएस संजय रंजन और जदयू नेता धर्मेंद्र तिवारी ने सम्मानित किया।

