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दोस्ती के नाम पर साजिश: खुद पर गोली चलवाकर दोस्त को फंसाया, पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा

बोकारो: बोकारो जिले के सेक्टर-12 थाना क्षेत्र में 23 अगस्त 2025 की रात हुई कथित फायरिंग की घटना ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब पुलिस जांच में सामने आया कि यह हमला असली नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। इस साजिश का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि खुद “शिकार” बनने वाला व्यक्ति ही निकला – अभिषेक प्रताप सिंह।

शुरुआत में अभिषेक ने आरोप लगाया था कि उसके पुराने ऑफिस पार्टनर चंद्रमोहन ओझा और उनकी पत्नी अर्चना ओझा ने पूर्व विवादों के कारण उस पर जानलेवा हमला करवाया। अभिषेक ने यहां तक कहा कि उसने चंद्रमोहन को 17 लाख रुपये दिए थे, जिनकी वापसी की मांग पर यह हमला हुआ। उसने थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी और मामला हत्या के प्रयास के रूप में दर्ज किया गया।

लेकिन पुलिस की गहन जांच ने पूरा सच सामने ला दिया। बोकारो के पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह के निर्देश पर नगर डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में गठित छापामारी दल ने इस झूठी कहानी का पर्दाफाश किया।

जांच में यह सामने आया कि अभिषेक ने अपने चचेरे भाई मंधीर कुमार सिंह के साथ मिलकर खुद पर हमला करवाने की योजना बनाई थी ताकि वह अपने दोस्त और उसकी पत्नी को फर्जी केस में फंसा सके और उन्हें जेल भेज सके। इस साजिश के तहत 23 अगस्त की रात जब अभिषेक सेक्टर-12 D/1165 स्थित अपने आवास की सीढ़ियों से उतर रहा था, तब मंधीर ने उस पर दो गोलियां चलाईं – लेकिन अभिषेक जानबूझकर खुद को घायल नहीं होने दिया और फिर नाटक करते हुए सीधे थाने पहुंचा।

पुलिस ने जांच के दौरान अभिषेक और मंधीर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से एक लोडेड 7.62 एमएम का देसी पिस्तौल, 19 जिंदा कारतूस, एक खाली खोखा, घटना में प्रयुक्त काली पल्सर मोटरसाइकिल और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। इस साजिश के खुलासे के बाद सेक्टर-12 थाना में एक नया मामला दर्ज किया गया है (कांड संख्या 115/25), जिसमें आर्म्स एक्ट की धाराएं 25 (1-B) A/26/35 लगाई गई हैं।

इस साजिश का खुलासा होते ही हत्या के आरोपों से डरकर परेशान चल रहे चंद्रमोहन ओझा और उनकी पत्नी अर्चना ओझा ने राहत की सांस ली। पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस कर पूरे मामले की जानकारी दी और आरोपियों को जेल भेजने की पुष्टि की।

इस पूरे ऑपरेशन में डीएसपी आलोक रंजन के साथ थाना प्रभारी सुभाष चंद्र सिंह, सुदामा कुमार दास, संजय कुमार और कुल 13 पुलिसकर्मियों की टीम शामिल रही, जिन्होंने इस जटिल साजिश की परतें खोल दीं।

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