धनबाद:धनबाद का नाम सुनते ही ज़ेहन में कोयले से लदे ट्रक, खदानों में दिन-रात मेहनत करते मजदूर, और सड़क किनारे कोयला चुनती महिलाएं—इन तमाम दृश्यों की कल्पना सामने आती है। लेकिन इन दिनों सड़कों पर न तो कोयले से लदे ट्रक हैं, न वैसी हलचल—बल्कि अब नज़र आती हैं सिर्फ़ दौड़ती बसें और इक्का-दुक्का गाड़ियां।
कोयला नगरी के नाम से पहचाने जाने वाले धनबाद में एक ऐतिहासिक बदलाव देखा गया है। वर्षों से फल-फूल रहे अवैध कोयला कारोबार पर आखिरकार कानून का शिकंजा कस गया है। नए सीनियर एसपी प्रभात कुमार की नियुक्ति के बाद जिस तत्परता और दृढ़ता के साथ कार्रवाई हुई, उसने वर्षों से बेखौफ चल रहे इस अवैध धंधे को पूरी तरह झकझोर दिया है।
एसएसपी प्रभात कुमार ने पदभार संभालते ही अवैध कोयला कारोबार को खत्म करना अपनी प्राथमिकता में सबसे ऊपर रखा। सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में जिले के कई इलाकों में एक के बाद एक छापेमारी की गई। बड़ी मात्रा में अवैध कोयला जब्त किया गया और इस धंधे से जुड़े कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
एसएसपी के नेतृत्व में बनी विशेष टीमों ने सिर्फ़ कोल माफिया के अड्डों पर ही नहीं, बल्कि इस धंधे को संरक्षण देने वालों की भी गहराई से जांच शुरू कर दी है। यह पहली बार हुआ है कि इतने संगठित तरीके से पूरे अवैध नेटवर्क पर एक साथ चोट की गई हो।
स्थानीय निवासी रंजीत कुमार कहते हैं:
“हमने तो कभी नहीं सोचा था कि यह धंधा सच में बंद होगा। पहले की कार्रवाई बस दिखावा लगती थी। अब पहली बार लगता है कि सिस्टम में ईमानदारी से काम हो रहा है।”
धनबाद में अब एक नई उम्मीद जागी है—एक ऐसा भविष्य जहाँ कानून का राज हो और अवैध गतिविधियों को कोई जगह न मिले। हालांकि, यह भी देखने वाली बात होगी कि क्या यह सख्ती लंबे समय तक बनी रहेगी या फिर हालात पुराने ढर्रे पर लौट जाएंगे।
फिलहाल इतना ज़रूर कहा जा सकता है:
धनबाद का संदेश साफ है—अब कानून से बड़ा कोई नहीं।

