जमशेदपुर: शिकार पर्व में आदिवासी समुदाय कुछ खास रीति-रिवाजों का पालन करता है, जिसमें शिकार करना और उससे संबंधित कई सांस्कृतिक क्रियाएं शामिल हैं। इस पर्व में पारंपरिक हथियारों का उपयोग करके जानवरों का शिकार किया जाता है, जिसके रोकथाम के लिए वन विभाग की पूरी टीम दलमा के अलग अलग क्षेत्रों में लगातार गश्ती करेगी।
उक्त जानकारी पत्रकारों को संबोधित करते हुए डीएफओ सबा आलम ने कही। उन्होंने आगे बताया कि ग्रामीणों द्वारा 4 व 5 मई को शिकार पर्व मनाने की घोषणा की गयी है जिसको लेकर वन विभाग के द्वारा लगातार ग्रामीणों को समझाया जा रहा है कि दलमा मे वे लोग शिकार न करके केवल पारंपरिक तरीके से पूजा कर जीव जंतुओं की रक्षा करें। उन्होंने यह भी बताया कि वे लोग ग्रामीणों को यह भी समझाएंगे कि दलमा में लगातार एक टाइगर की गतिविधि देखी गई है इसलिए वे लोग जंगल मे प्रवेश न करें। सबा आलम ने यह भी बताया कि शिकार पर्व को देखते हुए उन्होंने उपायुक्त, एसएसपी, एसडीओ से भी इस संबंध में वार्ता की है. उन्होंने यह भी बताया कि अगर ग्रामीण शिकार को लेकर जंगल में प्रवेश करेंगे तो उनलोगों पर कानूनी धाराओं के अंतर्गत सख्त कार्यवाही की जायेगी।
दलमा के डीएफओ सबा आलम अंसारी ने मानगो वन विभाग के कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में विभिन्न सेंदरा समितियों के प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे पारंपरिक विशु पर्व को सांकेतिक रूप से मनाएं और वन्य प्राणियों का शिकार न करें, साथ ही, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों के उपायुक्तों व पुलिस अधीक्षकों, तथा रेलवे मंडलों (रांची, आद्रा, खड़गपुर, चक्रधरपुर) से सहयोग का आग्रह किया गया है। पटमदा, बोड़ाम, चांडिल, नीमडीह समेत सभी संवेदनशील क्षेत्रों में चिकित्सा व पशु चिकित्सा पदाधिकारियों को तैनात किया गया है। दलमा टॉप के पिन्ड्राबेड़ा स्थित वन विश्रामागार में 4 व 5 मई को सुबह 6.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक विशेष चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। थाना प्रभारियों को किया गया अलर्ट विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित थाना प्रभारियों को अलर्ट किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में दंडाधिकारी एवं सशस्त्र बल की तैनाती हेतु अनुमंडल पदाधिकारियों से अनुरोध किया गया है। शिकार रोकने हेतु 11 चेकनाका और 17 वनपथों पर वनकर्मियों और पदाधिकारियों की तैनाती की गई है। 55 से अधिक वनकर्मियों और भारतीय वन सेवा के 10 तथा राज्य वन सेवा के 2 अधिकारियों को अभियान में शामिल किया गया है। छह सूचना केंद्र स्थापित किए गए आश्रयणी की इको विकास समितियों के साथ बैठक कर दिशानिर्देश दिए गए हैं। 6 सूचना केंद्र स्थापित किए गए हैं। वन विभाग और समितियां संयुक्त रूप से गहन गश्ती कर जाल-फांस की बरामदगी कर रही हैं। आवश्यक संसाधनों के लिए विभिन्न प्रमंडलों से वाहन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रेस वार्ता में रेंज अफसर दिनेश चंद्रा, अपर्णा चंद्रा सहित अन्य लोग मौजूद थे।

