, जन जन जागरूकता के तहत एवं आपातकालीन स्थिति से निपटने हेतु किसी के जीवन अगर किसी दुर्घटना के शिकार हो गया हो एवं उस समय को जिसे ” गोल्डन आवर ” कहते हैं. किस तरह से पीड़ित व्यक्ति के नजदीक या कहे तो दुर्घटना स्थल पर ही उपलब्ध साधनों से, हम किसी के जीवन को नजदीकी अस्पताल में पहुंचाने के पहले या कहे तो डॉक्टर को सुपुर्द करने के पहले किस तरह से सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं, इसका काफी अनुभवी एवं आधुनिक पद्धति जिसमें सुंदर प्रेजेंटेशन एवं प्रैक्टिकल के द्वारा प्रस्तुत किया गया. एक अनोखे अंदाज में हंसते हंसाते हुए जीवन बचाने का तरीका बताया गया. इस दौरान प्राथमिक सहायता का पहला कदम, लक्ष, प्राथमिक सहायताकर्ता के गुण, मानव शरीर में ह्रदय की संरचना, हड्डियों का टूट, सांप एवं कुत्ते के काटने पर सावधानियां एवं बचाव, बैंडेजिंग एवं सबसे महत्वपूर्ण बेहोशी की हालत में मुंह से मुंह के द्वारा दिया जाने वाला स्वसन क्रिया जिसे ” सीपीआर ” ( कार्डियक पलमोनरी रिससिटेशन ) के तहत किस तरह से ” गोल्डन आवर ” में किसी के जीवन को सुरक्षित रखा जा सकता है, बखूबी इसका प्रशिक्षणार्थियों के द्वारा ही प्रदान कराया गया. बीच-बीच में अच्छे अनुभव साझा करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को भी पीएसएफ के द्वारा प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया. इस दौरान स्कूल के प्रधान प्राचार्य श्रीमती रूपा घोष, सह प्राचार्य श्रीमती उषा राजशेखरन, वरिय शिक्षिका के रूप में आभा मिस्ट्रेस, सेफ क्लब मॉडरेटर, श्रीमती डॉली चटर्जी एवं श्रीमती सुष्मिता सिकदर जी उपस्थित रहे एवं प्रशिक्षण प्रदान करने वाले में पीएसएफ यानी प्रतिक संघर्ष फाउंडेशन से निर्देशक अरिजीत सरकार, कुमारेस हाजरा, विजोन सरकार एवं मोहम्मद दानिश जी ने आधुनिक तकनीक एवं लाइव प्रेजेंटेशन के द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया. सभी प्रशिक्षणार्थियों ने सीमित समय के इस कार्यशाला का भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए आगे भी इसे निरंतर जारी रखने का आश्वासन दिया गया. अंत में विद्यालय के प्रधान प्राचार्य जी के द्वारा प्रशिक्षण देने वाले सभी को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया.
पी एस एफ के द्वारा मानगो में प्रदान किया गया आपातकालीन प्राथमिक सहायता कार्यशाला

