बरदौनी-महुआडांड़ लैंपस में इस साल भी न खाद है न बीज
महुआडांड़ संवाददाता शहजाद आलम की रिपोर्ट
*लैंपस का कृषि पर नही ध्यान, गोदाम नही पर रूम किराये में देकर वसूल रहे पैसा, जर्जर गोदाम में पड़ा सड़ रहा पिछले साल का खरीदा धान*
महुआडांड़
मानसून के दस्तक देते ही प्रखंड के खेत-टाड़ में हल चल रहे है. मक्का-बदाम एवं धान बुनाई शुरू है. परंतु लैंपस बरदौनी व महुआडांड़ में ताला लटका हुआ है,महुआडांड़ लैंपस में 205 किसान का रजिस्ट्रेशन है, बरदौनी लैंपस में मात्र 51 किसान ही नामांकित है. खेती बारी सुरू हो गई है, पर लैंपस में न बीज है, न खाद आया है. इतना ही नही पिछले वर्ष खरीदा गया धान जर्जर रूम में पड़ा सड़ रहा है. जबकि लैंपस के जमीन में गोदाम के नाम आधा दर्जन से अधिक रूम का निर्माण करके दूकानदारों को किराए पर दिया गया है. एक रूम का प्रतिमाह किराया तीन हजार लिया जाता है।
*कागज़ में चल रहा लैंपस*
वृहत बहुधंधी सहयोग समिति लिमिटेड महुआडांड़ एवं बरदौनी (दो लैंपस) का गठन 1976 में हुआ. उद्देश्य था, पंजीकृत करके किसानों के साथ अनुदानित दर पर खाद बीज देना एवं धान क्रेय व्यवसाय करना, रवि एवं खरीफ फसल बीमा करना है. जबकि खरीफ और रवि फसल से पहले सहकारिता विभाग द्वारा लैंपस प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर धान बीज के लिए ड्राफ्ट लगवाना है, लेकिन हर साल कि तरह इस बार भी विभाग इस पर रूची नही लिया. मजबूर होकर किसान दूकान से ब्लैक में धान, मक्का, बदाम समेत अन्य बीज और खाद महंगे दरों पर खरीद रहे है।
हालांकि सरकार के द्वारा निजी खाद बीज दुकान से भी एग्रीमेंट किया गया, किंतु इसकी जानकारी अधितर किसानों को नही है, कि क्या प्रावधान है,जिसका फायदा निजी खाद बीज दुकान वाले उठा रहे है।

ज्ञात हो कि प्रखंड में बड़े रूप में धान खेती होती है. धान के साथ किसान टाड़ में मक्का और बदाम भी बड़े रूप में लगाते है, सिंचाई की व्यवस्था नहीं रहने कारण प्रखंड के किसान वर्षा एवं भगवान के भरोसे पूरे साल में केवल एक बार खरीफ फसल करते हैं।
*खेती: समय पर कृषि विभाग नही देता बीज*
किसान लुईस कुजूर ने कहा सरकार बड़े-बड़े आयोजन कर किसान के हितैनी होने का दावा करती है, लेकिन हकीकत अलग है, ग्रामीण क्षेत्र के छोटे छोटे किसान जिन्हे ध्यान में रखकर सरकार कृषि की कल्याणकारी योजाना बनाती है, वह धरातल उतरता नही है,आकड़े केवल कागज पर दर्ज होते है।
किसान सह पुर्व दूरूप पंचायत समिती सदस्य धर्मेद्र सिंह ने कहा पिछ्ले साल धान लैंपस को दिए थे, जिसका पूरा भुगतान अभी तक नही हुआ, लैंपस की बैठक भी कभी नही होती है, बीज और खाद तो पिछले 20 साल से नही मिला, लैंपस के ज्यादातर किसान कागज पर है, धान क्रय के समय भी किसान धान लैंपस में नही देना चाहता है।

किसान सफरूल अंसारी ने कहा पांच साल पहले लैंपस में रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन अनुदानित दर पर बीज, खाद का लाभ नही मिलने के कारण छोड़ दिया, काजग में किसान बने रहने का क्या फायदा जबकि लैंपस में न खाद मिलाता है न ही बीज मिलता है, ब्लेक में बीज, खाद लेकर इस बार भी खेती कर रहा हूं।
मनसु किसान ने कहा महंगे दर पर हर साल बीज, खाद लेकर खेती करते है, लैंपस में रजिस्ट्रेशन करके कैंसिल करा दिए, खेत जोताई महंगा हो गया है, बीज खाद भी पिछ्ले साल से महंगा हुआ है, किसानों को सरकार के अनुदानित दर का बीज और खाद का फायदा नही मिलता है।
महुआडांड़ व बरदौनी लैंपस में कार्यरत मनोज महली ने कहा कि अब तक न ही बीज आया है न खाद है, इस साल का ड्राफ्ट भी नही लगाया गया, गोदाम में पिछले साल का खरीदा 600 क्विंटल धान रखा है, जिसे भेजने का प्रबंध किया जा रहा है, लैंपस में जगह भी नही है।

