आज सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का एक प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष विजय आनंद मूनका के नेतृत्व में जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन के आमंत्रण पर उनसे आदित्यपुर स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात कर कोल्हान एवं झारखण्ड राज्य में औद्यागिक विकास और जियाडा क्षेत्र में उद्योगों मंे आ रही समस्याओं के निराकरण और सुझाव पर एक विस्तृत मांग/सुझाव पत्र सौंपा तथा बिंदुवार चचा की।
क्षेत्रीय निदेशक श्री प्रेम रंजन ने मेमोरण्डम केे एक-एक बिन्दुआंे और सुझावों पर ध्यानाकृष्ट करे हुये प्रतिनिधिमंडल की बातों को सुना और उसपर चर्चा करते हुये इसपर कार्य करने का आश्वासन दिया और कहा कि जो कार्य स्थानीय स्तर पर होने वाले हैं उसपर शीघ्रताषीघ्र कार्य किया जायेगा और जो राज्य स्तर के हैं उनको राज्य सरकार को अनुमोदित किया जायेगा।
प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष विजय आनंद मूनका, मानद महासचिव मानव केडिया, उपाध्यक्ष (उद्योग) महेश सोंथालिया, उपाध्यक्ष (व्यापार एवं वाणिज्य) नितेश धूत, उपाध्यक्ष (जनसंपर्क एवं कल्याण) मुकेश मित्तल, कोषाध्यक्ष किशोर गोलछा, आनंद चौधरी, मनोज अग्रवाल, मनोज गोयल आदि उपस्थित थे।
मेमोरण्डम
स्थानीय विषय:
1. इस क्षेत्र में कोई बड़ी ऑटोमोबाईल उत्पादन वाली कंपनी जो दो चक्का, तीन चक्का, चार चक्कमा, ट्रैक्टर आदि का निर्माण करती हो उनको आमंत्रित करके उद्योग लगाने हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि यहां पर अवस्थित लघु उद्योगों को भी बाजार मिल सके और यहां पर राजस्व एवं रोजगार की बढ़ोतरी हो।
2. आपके द्वारा आवंटित भूमि पर वन विभाग/अंचलाधिकारी से उद्योगों को कोई सरोकार नहीं होना चाहिए जबकि वर्तमान में अगर किसी उद्योग को अपने यहां से पेड़ों के हतस्तांतरण हेतु वन विभाग के कहने पर अंचलाधिकारी के यहां से अनापत्ति प्रमाण पत्र (छव्ब्द्ध लाना पड़ता है।
3. बिजली विभाग:
झारखण्ड वितरण निगम लिमिटेड से अनुरोध होगा कि उद्योगों हेतु हर मौसम में 23 घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिष्चित की जानी चाहिए।
4. सुधा डेयरी के आसपास शाम के समय काफी भीड़ हो जाती है अतः वहां पर सिग्नल सिस्टम तथा उपयुक्त मात्रा में स्ट्रीट लाईट/हाई मास्ट लाईट की आवष्यकता है।
5. दुगनी तथा अन्य नवआवंटित भूमियों पर आवष्यक आधारभूत संरचनाओं का अभाव है विषेषकर प्लॉट तक पहुंचने वाली सड़क। भूमि के उपर से पार हो रही तार, डेªनेज सिस्टम, स्ट्रीट लाईट आदि इन चीजों की अनुपलब्धता के बावजूद भी मासिक मेंटेनेन्स बिल ब्याज सहित जारी किया जाता है।
6. एम.एस.एम.ई. सेक्टर को मेरेटोरियम एवं क्रेडिट तक आसान पहुंच कम ब्याज दरों पर
सूक्ष्म, लघु और मध्यम को पिछले दो सालों में महामारी के कारण किस्त चुकाने में देरी के छूट कुछ अवधि तक बढ़ाना चाहिए। एम.एस.एम.ई स्टील उत्पादकों का क्रेडिट तक आसान पहुंच हो। बड़े उद्योगों को 2 प्रतिशत से 3 प्रतिशत तक ब्याज दर में उपलब्ध ऋण एम.एस.एम.ई. को भी मिले। वहीं बेतहाशा वृद्धि के कारण एम.एस.एम.ई. (स्टील उत्पादक) को अपने कच्चे माल हेतु करीब दोगुना फंड की व्यवस्था करनी पड़ रही है, स्टील बनाने का जो लागत खर्च है वो दोगुना हो गया है। लेकिन पूर्व की भांति भी लागत खर्च नहीं बच पा रहा है। इसपर गंभीरता से सरकार को विचार कर निदान निकाले तब ही बाजार के प्रतिस्पर्द्धा में कुछ हद तक एम.एस.एम.ई. (स्टील उत्पादक) टिक पायेगा।
7. सरकारी विभाग को एम.एस.एम.ई. सरल/मित्रवत् बनाना
पॉल्यूशन बोर्ड, स्टेट टैक्स, श्रम विभाग, उर्जा विभाग (इंस्पेक्टेरियर), फैक्ट्री लाईसेंसिंग विभाग को एम.एस.एम.ई. के प्रति लचीला रवैया ही एम.एस.एम.ई. को बचा सकता है।
8. जमषेदपुर जियाडा के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्र में संरचना में सुधार:
औद्योगिक क्षेत्र में लगभग पूरे क्षेत्र की सड़कें पुनः निर्माण योग्य हो गई हैं। कई स्थानों पर स्ट्रीट लाईट्स नहीं जलती हैं। वहीं सिवरेज लाईन एवं पेयजल पाईप बिछाने के नाम पर पूरे क्षेत्र को खोद दिये गये हैं। खोदे दिये गये सड़क का पुर्ननिर्माण कराया जाय। फैक्ट्री हेतु जो भूमि एलॉट किया जाता है उसका जुड़ाव सड़क से हो, तथा वह भूमि समतल अवस्था में होनी चाहिए न कि जमीन से नीचे गडढ्े में स्थित हो। अभी जो भी भूमि एलॉट किया जाता है वो अधिकांशतः गड्ढे में होती है। हाई टेंशन लाईन (इलेक्ट्रॉनिक लाईन) जमीन के उपर से न ले जाया जाय। इससे बड़ी दुघर्टना होने का हमेशा खतरा बना रहता है। नाली एवं स्ट्रीट लाईट की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
9. औद्योगिक क्षेत्र में लगभग सभी फेज में डेªनेज/नालियांे की सफाई पिछले 20 वर्षों से नहीं हुई है, देखने से ऐसा प्रतीत होता है। जबकि आपके द्वारा सभी उद्योगों से स्ट्रीट लाईट चार्ज/लेवी लिया जाता है तो उद्योगपति यह आषा करते हैं कि क्षेत्र का रख-रखाव समुचित एवं मूलभूत सुविधाओं का कार्य नियमित रूप से हो।
10. दुगनी में जुस्को की बिजली की उपलब्धता सुनिष्चित करने की महती कृपा की जाय।
11. राज्य सरकार द्वारा घोषित क्रय-विक्रय नीति का अनुपालन सुनिष्चित किया जाय।
12. आदित्यपुर नगर निगम द्वारा उद्योगों से होल्डिंग टैक्स वसूलने हेतु नोटिस निर्गत किया जा रहा है। हमारा यह मानना है कि होल्डिंग टैक्स जमीन के मालिक के द्वारा दिया जाना चाहिए। अतः इस होल्डिंग टैक्स का भुगतान जियाडा द्वारा किया जाना चाहिए और उद्योगों को इसके लिये नोटिस निर्गत नहीं किया जाय।
13. अगस्त 2017 में 7वीं फेज ई.एम.सी. का एलॉटमंेट हुआ था परंतु 5 वर्षों में भी जियाडा द्वारा आवश्यक आधारभूत संरचना मुहैया नहीं कराई गई। इस बीच मार्च 2020 में कोरोना के आने के बाद बहुत से उद्योगपतियों का स्थिति-परिस्थिति के मद्देनजर कुछ बदलाव की आवष्यकता महसूस की गई। अतः आपसे निवेदन होगा कि प्रोजेक्ट में बदलाव के लिये जिन उद्योगपतियों द्वारा आवेदन दिया गया या देंगे उनपर सहानुभूतिपूर्वक विचार करके आदेष देंगे।
14. बीको मोड़ एवं टीचर्स टेªेनिंग मोड़ के दोनों तरफ अतिक्रमण प्रचुर मात्रा में हो गया है जिससे कि आवागमन बाधित होता है। अतः निवेदन होगा इस क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराया जाय नहीं भविष्य में दुघर्टना की आषंका हमेषा बनी रहेगी।
राज्य स्तरीय नीतिगत विषय:
1. अन्य राज्यों की तरह 30 वर्षों से अधिक समयावधि वाले उद्योगों को मालिकाना हक दे दिया जाना चाहिए।
2. प्रदूषण विभाग से संबंधित:
क) कोई भी नई मषीनरी लगाने पर चाहे उसके लगाने के उपरांत उत्पादन में वृद्धि नहीं हो रही हो फिर भी ब्वदेमदज ज्म् लेना पड़ता है जो कि अव्यवहारिक है।
इस परिपेक्ष्य में हमारा सुझाव होगा कि निवेष या क्षमता को तय कर देना चाहिए ताकि मषीरनी लगाने पर कोई भी अनुमति की आवष्यकता नहीं हो।
ख) ब्तंदम – डंजमतपंस भ्ंदकसपदह म्ुनपचउमदज को ब्वदेमदज ज्म् के दायरे से पंूजी निवेष की गणना से बाहर रखना चाहिए।
3. ग्रीन सेस और इलेक्ट्रसिटी ड्यूटी की दर को कम किया जाना चाहिए।
4. समान बिजली दर की व्यवस्था:
कोल्हान क्षेत्र के उद्योगों को मिलने वाली बिजली की दर प्रदेश के अन्य जिलों में मिलने वाली बिजली दर के अनुरूप ही एक समान हो। विषेषकर वैसे उद्योगों को जिनका कि रॉ मैटेरियल बिजली ही है। वर्तमान मंे अभी यहां बिजली की दर राज्य दूसरे जिलों जैसे बोकारों, रामगढ़, महागामा इत्यादि में डीवीसी के द्वारा उपलबध कराई जाने वाली बिजली की दर से लगभग 40 प्रतिषत अधिक है। बिजली दर एक समान होने से यहां औद्योगिक निवेष होगा, रोजगार बढ़ेगा और झारखण्ड सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी। यहां पर जेवीएनएल की बिजली की दर लगभग 5.60 रूपये है जबकि डीवीसी की बिजली दर लगभग 3.60 रूपये है।
5. बिजली पोर्टेबिलीटी की सुविधा:
मोबाईल कंपनियों की तरह उद्योगों को बिजली पोर्टेबिलीटी की सुविधा उपलब्ध हो जिससे अगर उन्हें एक कंपनी से सही सर्विस न मिल रही हो तो वे दूसरे कंपनी में अपना बिजली कनेक्शन पोर्टेबल करा सके। इससे बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियों में अच्छी सर्विस देने के लिये प्रतिस्पर्द्धा होगी और इसमें सुधार होगा।
6. Crane & Material Handling Equipment dks Consent TE निवेष की गणना से बाहर रखना चाहिए।
7. माइक्रो लैंड कलस्टर:
दस हजार वर्गफीट तक के जमीन आवंटन हेतु अलग से माइक्रो लैंड कलस्टर की स्थापना की जानी चाहिए तथा इसका आवंटन बीडिंग प्रक्रिया के तहत नहीं करके लॉटरी या किसी नये माध्यम से की जानी चाहिए ताकि छोटे/नये उद्योगपतियों को सरकारी मूल्यों पर भूमि मिल सके।
8. स्पेषल इकोनोमिक जोन की स्थापना की जाय।
क्षेत्रीय निदेषक ने चैम्बर की मांग पर यह आष्वासन दिया कि अब उद्योगपतियों को छव्ब् लेने के लिये वन विभाग और अंचलधिकारी के पास नहीं जाना पड़ेगा वो अपना आवेदन आयडा कार्यालय में ही जमा करा दें। वो इसे संबंधित विभाग को भेज देंगे।
2. चैम्बर की मांग पर टूटी-फूटी सड़कों के बारे में बताया कि जियाडा के अंतर्गत लगभग 35 किलोमीटर अंतर्गत नई सड़क का निर्माण होगा और उसमंे 100 टन लोड की गाड़ियां भी चल सकेंगी।
3. डेªनेज एवं नालियों की सफाई के लिये राज्य सरकार द्वारा जल्द ही एजेंसी की नियुक्ति की जायेगी।
4. चैम्बर के सुझाव माईक्रो लैंड कलस्टर की स्थापना पर क्षेत्रीय निदेषक ने अपनी औपचारिक सहमति दर्षाते हुये इसे विभागीय सहमति हेतु अनुषंसा करने का आष्वासन दिया।

