*डेढ़गांव में जलमीनार खराब, आदिम जनजाति कोरवा समुदाय दूषित जल पीने को विवश*
गारू संवाददाता उमेश यादव की रिपोर्ट
गारू प्रखण्ड के बारेसांढ़ पंचायत के कोरवाटोला के पास दो जलमीनार डेढ़ दो वर्षों से खराब पड़ा है। आदिम जनजाति परिवार को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा कुछ ही वर्ष पहले जल मीनार का निर्माण कराया गया था।

तथा गांव उसी टोला में एक अन्य जल मीनार पंचायत निधि मद से निर्माण किया गया था। कुछ महीने में ही दोनों जलमीनार दम तोड़ दिया है, तब से लोग में शुद्ध पेयजल के लाले पड़े हुए हैं। बरसात तथा सर्दी के मौसम में कुछ दूर स्थित चापाकल से पेयजल आपूर्ति हो रही थी, परंतु बढ़ते गर्मी के प्रकोप के कारण अब वह भी जवाब देने लगा है।लिहाजा गांव के बुजुर्ग आदिम जनजाति बली कोरवा बताते हैं

कि, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा लगाया गया जलमीनार गांव का लाइफ लाइन था। गांव के सभी लोगों को पेयजल आपूर्ति संभव हो पा रही थी। पर अब गांव के दोनों जलमीनार खराब है और उसे बनवा पाना गांववालों की बस की बात भी नहीं है।
*सिंचाई के लिए बने कूप से पीते हैं पानी, बच्चे हो रहे हैं बीमार

डेढ़गांव के कोरवा टोली निवासी रजमतिया देवी बताती है की वे लोग खेत में बने सिंचाई कूप का पानी पीते हैं। जंगल किनारे गांव होने के कारण पेड़ों से प्रति दिन पत्ते कूप के गिरकर सड़ रहा होता है। वैसे में दूषित जल पीने से बच्चे के स्वास्थ्य में प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस सन्दर्भ में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग कनीय अभियंता महेंद्र राम से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, परन्तु संपर्क असफल रहा। ग्रामीणों नें उपायुक्त से शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की मांग किए हैं।

