सरकार द्वारा गांवों में संचालित विकासात्मक कार्यो की जिम्मेवारी ग्रामीण विकास विभाग को सौंपी गई है और व्यवस्था के सुचारू रूप से संचालन हेतु प्रखंडों में बीडीओ की नियुक्ति की गई है। परन्तु इसे विडंबना ही कहें कि महुआडांड़ जैसे लंबे चौड़े और पिछड़े प्रखंड में संपूर्ण प्रभार में बीडीओ के नहीं रहने से विकास कार्यो पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।इस दरम्यान प्रखंड से जुड़ी तमाम विकास योजनाओं यथा मनरेगा, इंदिरा आवास, बीआरजीएफ, वृद्धावस्था पेंशन, कन्या विवाह योजना, से लेकर जन्म मृत्यु रजिस्ट्रेशन जैसे कार्यो के संपादन में परेशानी हो रही है,बीडीओ के नहीं रहने मनरेगा में मजदूरों का मास्टर रोल शून्य कर दिया जा रहा है एवं भुगतान भी नहीं हो रहा है।गौरतलब है कि 28 जुलाई को प्रखंड से तात्कालीन बीडीओ टूडू दिलीप के विरमित होने के बाद गारू सीओ शम्भू राम को प्रभार सौंपा गया था,वह कुछ कार्य शुरू कर पाते कि इससे पूर्व ही ग्रामीण विकास विभाग द्वारा अमरेन डांग की नियुक्ति महुआडांड़ बीडीओ के तौर पर कर दी गई परंतु उन्होंने अभी तक अपना प्रभार ग्रहण नहीं किया है।बताते चले कि महुआडांड़ प्रखंड में अंचल पदाधिकारी,सीडीपीओ एवं एमओ का पद रिक्त होने के चलते बीडीओ ही इस पद को संभाल रहे थे परन्तु स्थायी बीडीओ नहीं रहने की वजह से प्रखंड में म्युटेशन,रासन कार्ड,जाति,आवासीय,आय समेत कई जनउपयोगी कार्य पर रोक लग गया है जिससे ग्रामीण भी परेशान है।वही बीडीओ के नही रहने से वितीय कार्यो में भी परेशानी हो रही है।

