Breaking
Sat. Jun 20th, 2026

भरत तिवारी की मौत की उच्चस्तरीय जांच हो, दोषी पुलिसकर्मियों पर हो कार्रवाई : डॉ. पवन पांडेय

जमशेदपुर : झारखंड ब्राह्मण शक्ति संघ के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. पवन पांडेय ने बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी युवक भरत भूषण तिवारी की पुलिस कार्रवाई में हुई मौत को लेकर गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया है। शनिवार को जारी अपने बयान में उन्होंने कहा कि यह घटना लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

डॉ. पांडेय ने कहा कि बिहार में अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की जाती है और आमतौर पर तभी मुठभेड़ की स्थिति बनती है जब अपराधी पुलिस पर हमला करते हैं या पुलिस के सामने प्रतिरोध की परिस्थिति उत्पन्न होती है। ऐसे में भरत भूषण तिवारी की मौत की घटना अत्यंत पीड़ादायक और चिंताजनक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यदि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, जैसा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से प्रतीत होता है, तो उसे हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए थी। आत्मसमर्पण के बाद किसी व्यक्ति को गोली मारना न्याय और कानून के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

डॉ. पांडेय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में हस्तक्षेप करने और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि घटना में किसी प्रकार की लापरवाही या गलत कार्रवाई सामने आती है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि समाज में गलत संदेश न जाए।

उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी मामले का संज्ञान लेने का आग्रह करते हुए कहा कि दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके अनुसार युवाओं को अपराध की राह से दूर रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है तथा न्यायिक प्रक्रिया का पालन हर परिस्थिति में होना चाहिए।

डॉ. पांडेय ने कहा कि इस घटना को किसी जाति या समुदाय विशेष से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे मानवाधिकार और न्याय के प्रश्न के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून के समक्ष सभी नागरिक समान हैं और निष्पक्ष जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पुलिस व्यवस्था पर जनता का विश्वास बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि कहीं भी वर्दी के दुरुपयोग की आशंका पैदा होती है तो उसकी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कायम रहे।

Related Post