सरायकेला। संथाली भाषा की ओल चिकी लिपि के शताब्दी वर्ष पर पूर्व मुख्यमंत्री सह सरायकेला विधायक चंपई सोरेन ने इसे आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि ओल चिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू के सम्मान में 100 रुपये का स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी होना पूरे संथाली समाज के आत्मसम्मान और गौरव से जुड़ा विषय है।
चंपई सोरेन ने इस निर्णय के लिए देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति और विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने वाली है। उन्होंने कहा कि पंडित रघुनाथ मुर्मू ने ओल चिकी लिपि का निर्माण कर संथाली भाषा को नई पहचान दी और उसे संगठित स्वरूप प्रदान किया। उनका योगदान केवल एक लिपि के निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज को सांस्कृतिक रूप से जागृत करने वाला रहा है।
उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य के निर्माण से लेकर संथाली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने तक लंबा संघर्ष किया गया। संसद में संथाली भाषा में अनुवाद की व्यवस्था सुनिश्चित होना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ऐसे निर्णयों से आदिवासी समाज को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिलता है और नई पीढ़ी को अपनी भाषा और परंपरा पर गर्व करने की प्रेरणा मिलती है।
उल्लेखनीय है कि ओल चिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भारत सरकार ने पंडित रघुनाथ मुर्मू की स्मृति में 100 रुपये का स्मारक सिक्का तथा विशेष डाक टिकट जारी किया है। इस अवसर पर संथाली समाज में उत्सव जैसा माहौल है और विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से उनके योगदान को याद किया जा रहा है।

