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Wed. Feb 18th, 2026

सूई, धागा और आत्मनिर्भरता की नई इबारत: मिर्जाडीह में महिलाओं के लिए निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण की शुरुआत

जमशेदपुर। जमशेदपुर के ग्रामीण क्षेत्र बोड़ाम प्रखंड अंतर्गत मिर्जाडीह गाँव की सुबह पहले जैसी ही थी—खेतों की पगडंडियों पर काम पर जाती महिलाएँ, घर–आंगन की जिम्मेदारियों में उलझे हाथ और मन में कहीं दबे छोटे-छोटे सपने। लेकिन इस बार सुबह कुछ अलग थी। इस बार उम्मीद ने दस्तक दी थी।

ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संस्कृति सोशल वेलफेयर फाउंडेशन ने मिर्जाडीह में निःशुल्क सिलाई मशीन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की। संस्था का मानना है कि महिलाओं को दान या अस्थायी सहायता नहीं, बल्कि ऐसा हुनर मिलना चाहिए जो उन्हें जीवनभर आत्मसम्मान और स्थायी आजीविका दे सके।

कार्यक्रम की शुरुआत एक सामूहिक बैठक से हुई, जिसमें गाँव की दर्जनों महिलाएँ शामिल हुईं। बातचीत की शुरुआत घर-परिवार की परेशानियों, बच्चों की पढ़ाई और बढ़ते खर्चों से हुई। इसी दौरान संस्था की टीम ने सिलाई प्रशिक्षण का प्रस्ताव रखा। शुरुआत में कुछ महिलाओं के चेहरे पर संकोच था, लेकिन जैसे-जैसे योजना की जानकारी मिली, उत्साह और विश्वास बढ़ता गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत बुधवार को कुल 60 ग्रामीण महिलाओं का चयन किया गया है। तीन महीने तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में महिलाओं को कपड़ों की कटिंग, नाप लेने की तकनीक, विभिन्न डिज़ाइन की सिलाई, ब्लाउज, सलवार-सूट, बच्चों के कपड़े और स्कूल यूनिफॉर्म तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरी तरह निःशुल्क है और इसमें भाग लेने के लिए किसी प्रकार की फीस या शर्त नहीं रखी गई है।

संस्था की ओर से प्रत्येक प्रतिभागी को कैची, दर्जी टेप, कपड़ा, सूता, चौक और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई है ताकि सीखने में किसी तरह की बाधा न आए। इतना ही नहीं, प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रत्येक महिला को सिलाई मशीन भी प्रदान करने की योजना है, जिससे वे घर बैठे ही अपना कार्य प्रारंभ कर सकें और आय अर्जित कर सकें।

संस्कृति सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के पास हुनर तो होता है, लेकिन संसाधनों और अवसरों की कमी उन्हें आगे बढ़ने से रोक देती है। इस पहल का उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, आर्थिक रूप से मजबूत करना और समाज में उनकी भागीदारी बढ़ाना है। संस्था भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अन्य गांवों में शुरू करने की योजना बना रही है।

प्रशिक्षण के पहले दिन का दृश्य भावनात्मक था। कई महिलाओं ने पहली बार सुई और मशीन को पेशेवर तरीके से पकड़ा। किसी की आंखों में झिझक थी, तो किसी में आत्मविश्वास की चमक। कुछ महिलाओं ने कहा कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करना चाहती हैं, तो कुछ ने अपने छोटे व्यवसाय की कल्पना भी कर ली है।

गांव के बुजुर्गों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी इस पहल की सराहना की और इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका मानना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, तो पूरा परिवार और समाज सशक्त होगा।

मिर्जाडीह की यह पहल केवल सिलाई सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और पहचान की नई शुरुआत है। सूई और धागे से बुनी जा रही यह कहानी आने वाले समय में कई घरों की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है। संस्कृति सोशल वेलफेयर फाउंडेशन की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के सपनों को आकार देने की दिशा में एक सशक्त प्रयास बनकर उभर रही है।

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