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साहित्य अकादमी में आयोजित, साहित्य उत्सव में भूमिज कविता भी शामिल हुई।

 

11से 16 मार्च 2024 तक साहित्य अकादमी नई दिल्ली के द्वारा रविंद्र भवन में साहित्य उत्सव का आयोजन हुआ। जिसमें झारखंड पूर्वी सिंहभूम पोटका के बड़ा सिगदी से सिद्धेश्वर सरदार उक्त साहित्य उत्सव में आदिवासी कवि सम्मेलन में 13 मार्च 2024 को अपनी आदिवासी भूमिज भाषा में कविता पाठ में ललद्यद सभा घर में शामिल हुआ। जिसमें और भी आदिवासी कवियों ने भाग लिया। जैसे चकमा, भील, भूमिज, गोंडी, कुई,परजा और सौरा भाषा के कवि भी शामिल थे। भूमिज भाषा का कविता आमा मेतदा;ओकय पु :चिंग (तुम्हारा आंसू कौन पोछेगा )समाज रेया ऐटके टोंडे सावधार दो दिशुम दरवार रेंगे ” (आज का समस्या का समाधान ढिशुम दरबार में) और आलोपे आदेया(खोना नहीं) भूमिज भाषा के कविता पाट में शामिल था। सिद्धेश्वर सरदार ने कहा कि देश भर के आदिवासी कवि, लेखक, साहित्यकार, कहानीकार इतिहासकार, उपन्यासकार कलाकारो के साथ मिलने का अवसर मिला, परिचय बड़ा। आदिवासी समुदाय के भाषा अलग होते हुए भी अपनापन लगा। बहुत प्यार और सम्मान मिला। मेरे मन संवेदनशीलता को ताकत दिया

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