संवाददाता शहजाद आलम की रिपोर्ट*** जिला ब्यूरो बबलू खान के साथ**********लातेहार जिला के गारू प्रखंड के पीढ़ी गांव के गनइखाड़ टोला में बीते दिनों 12 जुन को सुरक्षाबलों के द्वारा एक ग्रामीण की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बता दें कि गनइखाड़ में लगभग 30 घर है और यहां के लोग जंगल के करीब निवास करते हैं। ईस गांव में कोई भी नेटवर्क सुविधा नहीं है जिसके कारण वहां के लोग दूरसंचार के माध्यम से कोसों दूर हैं। इस घटना की जानकारी लेने को लेकर महुआडांड़ के सामाजिक कार्यकर्ता शशि पन्ना रामबिसुन नगेसिया राजू लाकड़ा मोहम्मद शहजाद आलम प्रकाश यादव सोमवार को गनईखाड़ पहुंचे और वहां के लोगों से रूबरू होकर इसके बारे में जानकारी ली। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता शशि पन्ना ने बताया कि शनिवार को लगभग सुबह 8:30 बजे इस तरह का हृदय हृदय विदारक घटना हुआ है। यहां के 7 लोग राजेश सिंह रघुनाथ सिंह शुक्ल सिंह दीनानाथ सिंह गोविंद सिंह ब्रह्मदेव सिंह गांव में हो रहे सरहुल त्यौहार को लेकर गांव के परंपरा के अनुसार पारंपरिक हथियार के साथ शिकार पर निकले हुए थे इसी दरमियान कुछ दूरी पर तैनात सुरक्षाबलों की नजर सभी पर पड़ी जिसके बाद सुरक्षाबलों के द्वारा उन्हें उग्रवादी समझ फायरिंग शुरू कर दी गई। जिसे देखते हुए पांच व्यक्ति वहां से भागकर नजदीक के घर में छुप गए और एक दिनानाथ सिंह पेड़ के पीछे छुप गया और ब्रह्मदेव सरेंडर करने को लेकर अपने हाथों को ऊपर उठा दिया लेकिन सुरक्षाबलों के द्वारा इसे अनदेखी करते हुए उसके पैर पर गोली मारी गई।
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जब गोली चालन का आवाज हुआ तो ग्रामीण और उसकी मां मालती देवी बीच बचाव के लिए आकर सुरक्षाबलों से हाथ जोड़कर प्रार्थना करने लगी और बोली कि यह मेरा बेटा है यह उग्रवादी नहीं है इसे छोड़ दीजिए लेकिन सुरक्षा बल के लोग इसकी एक भी ना सुने और वहां से उठाकर उसी गांव के ही नजदीक नाले के उस पार ले जाकर उसे और तीन गोली मारी गई। इसके बाद सभी 5 लोगों को जोकि ब्रह्मदेव के साथ थे उन्हें लेकर नजदीक के घर में खोजबीन करने पहुंचे इस दरमियान भी सुरक्षाबल एवं ग्रामीणों के बीच काफी झड़प हुई लेकिन सुरक्षाबलों के द्वारा नहीं माना गया और फायरिंग की गई जिसके बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। आगे शशि पन्ना ने कहा इस तरह की हृदय विदारक घटना काफी निंदनीय है यह सुरक्षाबलों से बहुत बड़ी चूक हुई है। ब्रह्मदेव नक्सली नहीं था उसे नक्सली के नाम पर मारा गया है। इसकी पुष्टि जिला के पुलिस अधीक्षक द्वारा भी की गई है। ब्रह्मदेव की मौत का जिम्मेदार पुलिस प्रशासन को ही माना जाएगा। क्योंकि पुलिस के पास इतना बड़ा खुफिया तंत्र और हर एक गांव में इसपाई होने के बावजूद भी प्रशासन को गलत इनपुट कैसे मिला और एक भोले-भाले ग्रामीण पुलिस की गोली के हत्थे चढ़ गए यह काफी निंदनीय है और बहुत ही दुख की बात है। और इस तरह की घटना पहली बार नहीं हुई है पहले भी इस प्रकार की घटना हो चुकी है। जैस चाईबासा गुमला खूंटी सराएकेला खरसावां,और बकोरोरिया की घटना भी किसी से छुपी हुई नहीं है किस प्रकार से भोले भाले ग्रामीण आदिवासियों को नक्सली कहकर मारा गया है। इस तरह की घटना पर कब लगाम लगेगा। जब तक प्रशासन के ऊपर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी तब तक इस तरह की घटनाएं रुकने वाला नहीं है। अगर अभी करवाई नहीं होता है तो आने वाले समय में भी इस तरह की घटना में बढ़ोतरी हो सकती है इनका मनोबल बढ़ता जाएगा। इस संबंध में हमारे कुछ विधायकों से भी बात हुई है इस विषय पर विधानसभा में भी प्रश्न उठेगा। वही हमारे झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन से भी हमारी मांग है कि इस घटना में उच्च स्तरीय जांच बैठा कर जो भी दोषी अधिकारी व अन्य पुलिसकर्मी है उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और जो पीड़ित परिवार है त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित परिवार को मुआवजा दें और और आश्रित को सरकारी नौकरी दिया जाए यही हमारी मांग सरकार से है। जिसे लेकर पुरे परिवार समेत गांव में मातम का माहौल बना हुआ है।
मृतक ब्रह्मदेव सिंह के मां मानती देवी बताती है कि मेरा बेटा गाड़ी चलाता था सरहुल त्यौहार होने के कारण वह कहीं नहीं गया था और सभी के साथ मिलकर त्यौहार को लेकर शिकार खेलने के लिए जा रहा था बहुत दूर गया भी नहीं था लगभग डेढ़ सौ कदम की दूरी में पहुंचते ही पुलिस वालों के द्वारा गोली चलाया गया मेरा बेटा हाथ उठाकर सरेंडर कर रहा था लेकिन पुलिस वाले नहीं माने और उस पर फायरिंग की जिसके बाद मैं और गांव के लोग वहां पर पहुंचकर हाथ जोड़कर विनती प्रार्थना करने लगे कि मेरे बेटे को मत मारिए यह निर्दोष है यह है उग्रवादी नहीं है यह गांव का है हम लोगों के द्वारा प्रशासन को आधार कार्ड भी दिखाया गया लेकिन नहीं माने और मेरे ऊपर भी प्रशासन वाले दबाव बनाते हुए चारों ओर से हमें भी खेती कुछ भी कहने से मुझे डांटा फटकारा गया मुझे डराया धमकाया गया । और एक लड़का जिसका दीनानाथ सिंह नाम है उसके उंगली में गोली लगी। इतना कुछ खो जाने के बावजूद भी अभी तक यहां पर कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचे ना ही उन लोगों के द्वारा हमें किसी प्रकार की संताव्ना मिली है।
वही उस ग्राम के ग्राम प्रधान मोदी सिंह ग्रामीण मनोहर सिंह कमलेश्वर सिंह प्रमिला देवी सोनी देवी पनपतिया देवी बुधनी देवी आदि लोगों का कहना है कि पुलिस प्रशासन का इस तरह घटना को अंजाम देना काफी दुखद है। हम सभी गांव के लोग सरहुल का त्यौहार मना रहे थे लेकिन अचानक यह खुशी का माहौल गम के माहौल में तब्दील हो गया। हम लोगों को क्या पता था कि हमारे गांव में इस तरह की घटना होने वाले की हम सभी को हमारे गांव के ही बच्चे का मरा हुआ मुंह देखने को मिलेगा। इन सभी लोगों का कहना है कि हम अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रहते हैं पहाड़ी क्षेत्रों में रहते हैं इस वजह से हम लोगों के साथ इस तरह का घटना हुआ हम इस गांव को छोड़कर भी कहीं नहीं जा सकते यह हमारे पूर्वजों का दिया हुआ है हम यहां पर अपना खेती-बाड़ी कर अपना आजीविका चलाते हैं इसके कारण हम यहां से कहीं जा भी नहीं सकते। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि यह जिस तरह की घटना हुई है इस पर संज्ञान लेते हुए दोषियों पर कार्रवाई करें।

