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*मोबाइल का पैसा लेकर डिलीवरी नहीं करने पर कंपनी को 42,470 रुपये देने का आदेश*

चाईबासा: जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, सरायकेला-खरसावां ने ऑनलाइन मोबाइल खरीद के मामले में कंपनी को उपभोक्ता को कुल 42,470 रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने मामले को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। कंपनी को मोबाइल के लिए ली गई राशि वापस करने के साथ मानसिक एवं आर्थिक परेशानी के लिए मुआवजा और मुकदमा खर्च देने का निर्देश दिया गया है।

मामला उपभोक्ता वाद संख्या 1/2026 से संबंधित है। आदित्यपुर-2, जमशेदपुर निवासी अजीत कुमार सिंह, पिता लल्लन सिंह ने ग्रीन वेब सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड, देवास, मध्य प्रदेश के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के तहत शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने 6 दिसंबर 2025 को संबंधित वेबसाइट से 2,470 रुपये में मोबाइल फोन खरीदा था। इसके लिए Paytm UPI के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान किया गया था। कंपनी ने सात दिनों के भीतर मोबाइल की डिलीवरी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी मोबाइल नहीं पहुंचा।

अजीत कुमार सिंह ने कंपनी से कई बार संपर्क कर मोबाइल की डिलीवरी करने या भुगतान की राशि वापस करने का अनुरोध किया। इसके बावजूद उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। 25 फरवरी 2026 तक न तो मोबाइल की डिलीवरी हुई और न ही राशि वापस की गई। इसके बाद उन्होंने ई-मेल के माध्यम से भी कंपनी से संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से कंपनी को नोटिस जारी किया गया। नोटिस मिलने के बावजूद कंपनी की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद 30 जुलाई 2026 के आदेश से आयोग ने मामले की सुनवाई एकतरफा करने का निर्णय लिया।

शिकायतकर्ता ने शपथ-पत्र के माध्यम से अपना बयान और लिखित बहस प्रस्तुत की। साथ ही भुगतान की रसीद, ई-मेल संवाद सहित अन्य दस्तावेज आयोग के समक्ष रखे। आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि कंपनी ने 2,470 रुपये लेने के बावजूद न तो मोबाइल की डिलीवरी की और न ही राशि वापस की।

आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, सदस्य प्रदीप कुमार मिश्रा एवं सदस्य संजीव/संजू शाही की पीठ ने कंपनी को 2,470 रुपये मूल राशि, 30,000 रुपये मानसिक एवं आर्थिक परेशानी के मुआवजे और 10,000 रुपये मुकदमा खर्च के रूप में देने का आदेश दिया। इस तरह कुल 42,470 रुपये का भुगतान करना होगा।

आयोग ने कंपनी को आदेश की तिथि से 45 दिनों के भीतर राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर राशि विधि सम्मत प्रक्रिया से वसूल की जाएगी और बकाया राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

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