जमशेदपुर: बाल्डविन फार्म एरिया हाई स्कूल, कदमा में कक्षा चार और पांच के विद्यार्थियों के अभिभावकों के लिए अभिभावक मार्गदर्शन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बच्चों के भावनात्मक और मानसिक विकास के साथ-साथ सकारात्मक अभिभावकत्व, प्रभावी संवाद और बेहतर पारिवारिक माहौल जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यशाला का संचालन रसायन अभियंता, शिक्षाविद्, लेखक, सामाजिक चिंतक और प्रमाणित राजाधिराज योग साधक राजेंद्र देव ने किया। संवादात्मक सत्र के दौरान उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की भावनाओं को समझने, उनकी बातों को धैर्यपूर्वक सुनने और उनके साथ संवेदनशील तरीके से संवाद स्थापित करने पर जोर दिया।
राजेंद्र देव ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में घर का वातावरण और अभिभावकों का व्यवहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने प्रेम, धैर्य और संवेदनशीलता के साथ बच्चों का पालन-पोषण करने की जरूरत बताई। साथ ही, बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने के लिए अभिभावकों और बच्चों के बीच विश्वास एवं मजबूत संबंध को जरूरी बताया।
कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. सुभश्री सरकार, शैक्षणिक निदेशक डॉ. अशोक कुमार सिंह, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्तकर्ता, उप-प्रधानाचार्या अर्चना बोस और प्रशासक सचिन कुमार समेत बड़ी संख्या में अभिभावक मौजूद रहे।
इस मौके पर शैक्षणिक निदेशक डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय और अभिभावकों के बीच निरंतर संवाद और बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को विद्यालय और परिवार के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
प्रशासनिक निदेशक डॉ. राजीव रंजन सिन्हा, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्तकर्ता तथा सचिव प्रभास कुमार ने भी कार्यशाला की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा केवल विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व और व्यवहार के विकास में परिवार की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने भविष्य में इस तरह के कार्यक्रमों को और व्यापक स्तर पर आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यशाला के दौरान अभिभावकों को बच्चों के साथ सकारात्मक व्यवहार, भावनात्मक जरूरतों को समझने और घर में सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार करने को लेकर व्यावहारिक सुझाव भी दिए गए। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
कार्यशाला ने अभिभावकों को बच्चों को आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और संतुलित व्यक्तित्व के रूप में विकसित करने के लिए उपयोगी मार्गदर्शन दिया। साथ ही, विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर साझेदारी की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण रही।

