चाईबासा: भाजपा झारखंड प्रदेश के पूर्व उपाध्यक्ष और झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई ने सेवा संकल्प अभियान के तहत तांतनगर प्रखंड के कूदाबासा गांव पहुंचकर ग्रामीणों से मुलाकात की। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और क्षेत्र की मूलभूत जरूरतों की जानकारी ली।
ग्रामीणों ने मुख्य रूप से सड़क, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को पूर्व मंत्री के सामने रखा। ग्रामीणों ने कहा कि कई जगहों पर बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है। गागराई ने ग्रामीणों को समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करने का भरोसा दिया।
पूर्व मंत्री ने ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर संबंधित विभाग के पदाधिकारियों से दूरभाष पर चर्चा की और जल्द समाधान की दिशा में कार्रवाई करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि जनता की सेवा, समस्याओं का समाधान और क्षेत्र का विकास ही उनका संकल्प है।
इस दौरान गागराई ने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ संबंधित विधायक और सांसद की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सड़क, पेयजल जैसी बुनियादी समस्याएं लंबे समय से ग्रामीणों के सामने हैं। इसके बावजूद इनके स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित काम नहीं हुआ है। उन्होंने झारखंड सरकार पर भी ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत समस्याओं को लेकर गंभीरता से काम नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को गांवों की समस्याओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
पूर्व मंत्री ने कहा कि लगातार हो रही बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मिट्टी से बने घर, जिसमें नमी आ जाने के कारण दीवार भर भरा कर गिर गई है, लेकिन इसका सूद लेने वाला कोई नहीं है। चुनाव के समय तो नेता लोग घर-घर जाकर अपने पक्ष में वोट जरूर मांगते हैं, लेकिन जनता की तकलीफ और समस्याओं से उन्हें कोई मतलब नहीं है। घर गिरने के कारण न जाने कितने लोग मारे गए, इसकी भी जानकारी जनप्रतिनिधि को नहीं है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से पूछा कि सरकार के द्वारा चलाए जा रहे आवास योजनाओं का क्या होगा, जब ग्रामीण अपना घर प्लास्टिक त्रिपाल लगाकर बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र के दौरे के दौरान ग्रामीणों से सीधे मिलकर समस्याओं की जानकारी ली जा रही है और संबंधित विभाग के अधिकारियों तक उनकी बात पहुंचाई जा रही है।
मौके पर प्रकाश गोप, वार्ड सदस्य शेखर सामड, दयानिधि सामड, परमेश्वर सामड, बलदेव सामड, रोमनकृष्ण सामड, समीर सामड, रैना सामड और माड़ गोप सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे।

