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Wed. Sep 23rd, 2026

*हाथियों ने तीन घरों को किया क्षतिग्रस्त, ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी* *मानसिंह तिरिया ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात, 30 सितंबर को बड़ा जामदा में पुतला दहन की घोषणा*

चाईबासा: नोवामुंडी प्रखंड के दिरीबुरू पंचायत अंतर्गत कोन्तोडेया गांव में जंगली हाथियों द्वारा मकान क्षतिग्रस्त किए जाने के मामले को लेकर बुधवार को ग्रामीण मुंडा बुधराम सिरका की अध्यक्षता में ग्रामीणों की बैठक हुई। बैठक में आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के जिला अध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य मानसिंह तिरिया भी शामिल हुए। उन्होंने हाथियों से प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली।

ग्रामीणों के अनुसार 20 सितंबर की रात करीब 12 बजे जंगली हाथियों का झुंड गांव पहुंचा और कई घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। पीड़ित परिवारों ने बताया कि घटना के समय एक कमरे में करीब 10 लोग सो रहे थे। हाथियों के अचानक घर को घेर लेने के कारण उन्हें बाहर निकलने का मौका भी नहीं मिला। परिवार के सदस्यों ने किसी तरह अपनी जान बचाई।

पीड़ित परिवारों ने बताया कि हाथियों ने मकान को क्षतिग्रस्त करने के साथ घर में रखा चावल, धान और अन्य राशन सामग्री भी खा लिया। घटना से प्रभावित परिवारों में छोटा सिरका, रोया अंगरिया और सुखराम सिरका शामिल हैं। मकानों को हुए नुकसान के कारण परिवारों के सामने रहने और भोजन की समस्या खड़ी हो गई है।

मानसिंह तिरिया ने कहा कि जंगली हाथियों के गांवों की ओर आने के कारणों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में गलत तरीके से दिन-रात खनन कार्य किए जाने से जंगल और वन्य क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं, जिसके कारण हाथियों के गांवों की ओर आने की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया।

तिरिया ने कहा कि वर्षों से उनका संगठन मजदूरों के हित में आंदोलन करता रहा है। उन्होंने बंद खदानों को चालू कर स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि क्षेत्र से पलायन को रोका जा सके।

उन्होंने घोषणा की कि गलत तरीके से किए जा रहे खनन कार्य और वन संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर 30 सितंबर 2026 को बड़ा जामदा में वन संरक्षण, खनन पदाधिकारी, डीएफओ और डीएमओ के खिलाफ पुतला दहन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में हाथियों से प्रभावित पीड़ित परिवार भी शामिल होंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से प्रभावित परिवारों को उचित सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।

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