चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में 22 से 28 सितंबर 2026 तक विश्व रेबीज जागरूकता सप्ताह मनाया जाएगा। इस वर्ष जागरूकता सप्ताह की थीम ‘मिलकर मजबूत बनें’ रखी गई है। इस दौरान जिले के लोगों को रेबीज जैसी गंभीर बीमारी से बचाव, समय पर उपचार और टीकाकरण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
रेबीज मुख्य रूप से संक्रमित कुत्ते, बिल्ली, बंदर सहित अन्य जानवरों के काटने या खरोंचने से फैल सकता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को सलाह दी गई है कि किसी भी जानवर के काटने या खरोंचने की घटना को नजरअंदाज नहीं करें। समय पर सावधानी और चिकित्सकीय उपचार से रेबीज से बचाव संभव है।
जानवर के काटने या खरोंचने पर सबसे पहले प्रभावित स्थान को साबुन और बहते हुए साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। घाव पर मिर्च, सरसों का तेल या किसी अन्य घरेलू पदार्थ अथवा रसायन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। घाव धोने के बाद बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। चिकित्सक की सलाह के अनुसार रेबीज से बचाव का टीका निर्धारित समय पर लगवाना जरूरी है।
उपायुक्त मनीष कुमार ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि रेबीज गंभीर और जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर सावधानी, चिकित्सकीय सलाह और निर्धारित टीकाकरण के माध्यम से इससे बचाव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कुत्ते, बिल्ली, बंदर या किसी अन्य जानवर के काटने अथवा खरोंचने पर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
उपायुक्त ने कहा कि पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण कराना भी रेबीज की रोकथाम में महत्वपूर्ण है। साथ ही बच्चों और आम लोगों को आवारा तथा अनजान पशुओं से सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए जागरूक करना जरूरी है।
उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी रेबीज से बचाव के उपायों की जानकारी दें। उन्होंने कहा कि समय पर प्राथमिक उपचार, चिकित्सकीय परामर्श और निर्धारित टीकाकरण रेबीज से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय हैं।

