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श्रीहरि के नाम संकीर्तन से मनुष्य के जीवन में आती है शांति : गुरु मां, जमशेदपुर में 1200 से अधिक बच्चों ने लिया आध्यात्मिक सत्र में हिस्सा

जमशेदपुर। भगवान के नाम का स्मरण और संकीर्तन मनुष्य को भीतर से शुद्ध करने के साथ जीवन में सकारात्मकता और शांति का मार्ग दिखाता है। बच्चों को छोटी उम्र से ही भगवान की भक्ति, भारतीय संस्कृति और शास्त्रों से जोड़ना आवश्यक है, ताकि उनमें अच्छे संस्कार विकसित हों। यह प्रवचन श्रीमती रेणुका पुंडरीक गोस्वामी ‘गुरु मां’ ने रविवार को साकची स्थित राजेंद्र विद्यालय सभागार में आयोजित विशेष निमाई पाठशाला सत्र के दौरान दिया।

जमशेदपुर में पहली बार आयोजित इस विशेष आध्यात्मिक आयोजन में 1200 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। निमाई पाठशाला झारखंड की ओर से वृंदावनी संकीर्तन मंडली के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में गुरु मां ने बच्चों को हरिनाम संकीर्तन और भगवान के स्मरण का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के आचरण और जीवन पद्धति में दिखाई देनी चाहिए। बच्चों के मन में बचपन से ही भगवान के प्रति श्रद्धा और सेवा भाव विकसित करने से उनके जीवन में संस्कार मजबूत होते हैं।

गुरु मां ने शास्त्रों के प्रसंगों के माध्यम से विद्यार्थियों को धर्म, भक्ति और सदाचार का महत्व बताया। प्रश्नोत्तर सत्र में बच्चों ने उनसे आध्यात्मिक और धार्मिक विषयों पर सवाल किए, जिनका उन्होंने सहज और सरल तरीके से उत्तर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से भगवान का नाम लेने, अपने माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करने तथा अच्छे कर्म करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के दौरान हरिनाम संकीर्तन से पूरा सभागार भक्तिमय हो गया। विद्यार्थियों ने विभिन्न पशु-पक्षियों का रूप धारण कर गुरु मां के साथ नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके माध्यम से श्री चैतन्य महाप्रभु की झारखंड के जंगलों में की गई संकीर्तन लीला की झांकी प्रस्तुत की गई। चैतन्य चरितामृत में वर्णित इस प्रसंग की प्रस्तुति ने बच्चों और उपस्थित श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

कार्यक्रम को लेकर सुबह से ही विद्यार्थियों और अभिभावकों में उत्साह रहा। बोधि मैदान से राजेंद्र विद्यालय सभागार तक विद्यार्थियों की लंबी कतार दिखाई दी। अंत में सामूहिक नाम संकीर्तन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। निमाई पाठशाला झारखंड के राज्य संयोजक ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम में प्रमुख योगदान के लिए अंकित रिंगसिया और कुणाल कुमार को सम्मानित किया गया तथा दोनों ने गुरु मां का अभिनंदन किया।

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