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खेत को पानी देने के लिए पैसा पानी की तरह बहाया गया, फिर भी नहर से खेतो को नहीं मिला पानी

*खेत को पानी देने के लिए पैसा पानी की तरह बहाया गया, फिर भी नहर से खेतो को नहीं मिला पानी *

 

 

मोहम्मद शहजाद आलम

 

करोड़ो रूपए खर्च करने के बावजूद भी नकटी नदी नहर परियोजना से अंमवाटोली और महुआडांड़ पंचायत के अंतर्गत सैकड़ो एकड़ खेत में हरियाली नही आई, लेकिन बरसात आते ही नहर में घास-पौधे उग आये है, पानी के अभाव में किसानों का खेती परती पड़ा है, जिसे लेकर किसानों में भारी गुस्सा और निराशा है, वही घास-पौधे उग आने से नहर में हरियाली ही हरियाली नजर आती है।

 

लघु सिंचाई विभाग के द्वारा वर्ष 2017 में 3 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत से कश्यप कन्स्ट्रक्शन द्वारा नकटी नदी नहर परियोजना से पूर्व कच्ची नहर को पक्कीकरण कराया गया. जिसकी लम्बाई साढ़े तीन किलोमीटर थी, ताकि किसानों को कृषि कार्य के लिए पानी मिले, इसके निर्माण से किसान खुश थे, लेकिन करोड़ो रूपए खर्च होने के बावजूद किसानों को निराशा हाथ लगी है. जहां घटिया एवं स्तरहीन निर्माण के चलते करोड़ो रूपए का बना पक्का नहर का कंक्रीट कई जगह टूटा हुआ है।

 

ग्रामीण अनिल सिन्हा कहते है, नहर पक्कीकरण कार्यो में गुणवत्ता नहीं थी, अधिकारियों द्वारा इसकी मॉनिटरिंग कभी किया नही गया, किसानों के द्वारा शिकायत करने के बाद भी उनकी बातों को नजर अंदाज किया गया था, निर्माण कार्य एक साल में पूरा करना था, लेकिन संवेदक नहर पक्कीकरण का काम पांच वर्ष तक करता रहा।

 

तहबूल, नेजाम, कृष्णा, रतिया अन्य किसान कहते हैं कि करोड़ों रुपए खर्च कर पुरानी व्यवस्था को बर्बाद किया गया, जब कच्ची नहर थी, तो मानसून की हल्की बारिश होते हमलोग खेत में पानी घुसा लेते थे, और बीहन छूट लेते थे, पिछले साल पानी के अभाव में खेती नहीं हुआ, इस साल भी लगता है, कि महुआडांड़ अकाल के मुहांने में खड़ा है।

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